
नई दिल्ली। धार्मिक आस्था से भरी एक यात्रा पलभर में मातम में बदल गई। अयोध्या से लौट रहे महरौनी के आठ श्रद्धालुओं की सोमवार सुबह दर्दनाक सड़क हादसे में मौत हो गई। सरयू घाट पर ली गई उनकी मुस्कुराती सेल्फी अब परिजनों के लिए आखिरी निशानी बनकर रह गई है।
महरौनी के खचवाचपुरा मोहल्ले के ये सभी श्रद्धालु 30 अप्रैल को अयोध्या गए थे। यहां उन्होंने सरयू नदी में खंडित मूर्तियों का विसर्जन किया और हनुमानगढ़ी व रामलला मंदिर में दर्शन किए। इसी दौरान सरयू घाट पर उन्होंने हंसते-मुस्कुराते हुए एक सेल्फी ली। शायद जिंदगी की खूबसूरत याद के लिए, लेकिन यही तस्वीर उनकी आखिरी बन जाएगी, इसका किसी को अंदाजा नहीं था।
रविवार रात करीब 8 बजे सभी लोग टवेरा कार से वापस महरौनी के लिए रवाना हुए। सोमवार सुबह करीब 6 बजे कालपी क्षेत्र के जोल्हूपुर मोड़ के पास उनकी कार हादसे का शिकार हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और मौके पर ही आठों श्रद्धालुओं की मौत हो गई।
हादसे में जान गंवाने वालों में शशिकांत तिवारी (30), कृष्णकांत नायक (38), स्वामी प्रसाद तिवारी (58), मनोज भोड़ेले (36), देशराज नामदेव (36), उमेश तिवारी (25), दीपक तिवारी (30) और बृजभूषण तिवारी (45) शामिल हैं।
एक ही मोहल्ले के आठ लोगों की मौत
एक ही मोहल्ले के आठ लोगों की मौत की खबर जैसे ही महरौनी पहुंची, पूरा इलाका शोक में डूब गया। हर गली में सन्ना।टा पसरा रहा और घरों से सिर्फ रोने की आवाजें आती रहीं। कई परिवारों के एक साथ चिराग बुझ गए। कहीं छोटे-छोटे बच्चे अनाथ हो गए तो कहीं बूढ़े माता-पिता बेसहारा हो गए।
मृतकों में कोई शिक्षक था, कोई दुकानदार, कोई किसान हर घर की अपनी कहानी थी, जो इस हादसे ने अधूरी छोड़ दी। किसी की छह महीने की बच्ची है, तो किसी की बेटियां पढ़ाई में आगे बढ़ रही थीं। एक ही झटके में कई परिवारों की दुनिया उजड़ गई।
यह यात्रा महरौनी के राम जानकी मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद पुरानी मूर्तियों के विसर्जन के लिए की गई थी। पूजा-अर्चना और दर्शन के बाद लौटते समय यह यात्रा ही उनका अंतिम सफर बन गई।इस दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है और एक सवाल फिर खड़ा कर दिया हैक्या हमारी सड़कें और सफर सच में सुरक्षित हैं?
