विद्युत विभाग की ओर से शहर में लगभग 23 घंटे 55 मिनट बिजली आपूर्ति का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, मुख्यालय क्षेत्र में मुश्किल से 20 से 21 घंटे बिजली मिल पा रही है, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह आपूर्ति घटकर लगभग 14 घंटे तक सीमित रह गई है।
लोगों का कहना है कि लगातार और बिना सूचना के हो रही बिजली कटौती से रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं। पानी भरने, खाना पकाने और अन्य घरेलू कार्यों में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नागरिकों ने मांग की है कि यदि बिजली कटौती की पहले से जानकारी दी जाए, तो वे अपनी दिनचर्या को बेहतर तरीके से व्यवस्थित कर सकते हैं।
शहर के विकास कार्य भी बिजली व्यवस्था पर असर डाल रहे हैं। परमानंद चौक से चरखारी बाईपास सड़क चौड़ीकरण के चलते बिजली पोल शिफ्टिंग और जल निगम की पाइपलाइन बिछाने का काम चल रहा है। इसी कारण कई स्थानों पर आपूर्ति बाधित हो रही है। हालांकि, नए पोल्स पर केबल शिफ्टिंग के बाद कुछ क्षेत्रों में राहत जरूर मिली है।
गर्मी के इस मौसम में ट्रांसफार्मरों पर बढ़ते लोड और लो-वोल्टेज की समस्या भी गंभीर रूप ले चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय बिजली की वोल्टेज गिरने से कूलर और एसी ठीक से काम नहीं कर रहे, जिससे गर्मी और ज्यादा असहनीय हो जाती है।
दुकानदारों और युवाओं ने भी बिजली संकट पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि व्यापार और दैनिक जीवन दोनों प्रभावित हो रहे हैं। बिजली कटौती के कारण छोटे कारोबारियों को नुकसान झेलना पड़ रहा है।
दक्षिणांचल विद्युत वितरण खंड के अधीक्षण अभियंता द्वारा स्थिति पर नजर रखी जा रही है और काम की प्रगति का निरीक्षण भी किया जा रहा है, लेकिन फिलहाल उपभोक्ताओं को राहत मिलती नहीं दिख रही है।
फिलहाल महोबा में गर्मी और बिजली संकट की दोहरी मार से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है और लोग जल्द समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
