नई दिल्ली(New Delhi)।उत्तर प्रदेश में पेट्रोल-डीजल को लेकर एक बार फिर अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिल रहा है। कुशीनगर, सोनभद्र, महराजगंज, गोरखपुर, देवरिया और बस्ती जैसे जिलों में कई पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें लग गईं और कई जगहों पर ईंधन खत्म होने की खबरें सामने आईं। हालांकि तेल कंपनियों और प्रशासन का कहना है कि राज्य में किसी तरह की कमी नहीं है और सप्लाई पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।
महराजगंज में स्थिति और भी गंभीर बताई जा रही है, जहां 149 पेट्रोल पंपों में से केवल 20 पर ही ईंधन उपलब्ध है। इसके चलते लोग बड़े-बड़े डिब्बे लेकर पेट्रोल भरवाने के लिए पंपों पर पहुंच रहे हैं और लंबी लाइनों में खड़े नजर आ रहे हैं। कई किसान रात से ही अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लग रही है।
कुशीनगर और गोरखपुर में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिल रही है, जबकि बस्ती में प्रशासन ने पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर सीमा तय कर दी है। बाइक सवारों को 200 रुपये और कार चालकों को 1000 रुपये तक ही ईंधन दिया जा रहा है।
इस पूरे मामले पर खाद्य एवं रसद नागरिक आपूर्ति मंत्री ने कहा है कि पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी और लोगों को जरूरत के अनुसार ही ईंधन भरवाना चाहिए। उन्होंने जमाखोरी से बचने की अपील करते हुए इसे वैश्विक संकट से जोड़कर बताया है। साथ ही उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे समय में राजनीति नहीं होनी चाहिए।
इसी बीच तेल उद्योग के अधिकारियों ने भी स्पष्ट किया है कि राज्य में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और सप्लाई पूरी तरह सामान्य है। डिपो से लेकर पेट्रोल पंपों तक नियमित आपूर्ति जारी है, इसलिए घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
वहीं दूसरी ओर, इस मुद्दे के बीच सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है, जिससे मामला और अधिक चर्चा में आ गया है।
