नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में रविवार को उस समय बड़ा राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन देखने को मिला जब ब्रिगेड परेड ग्राउंड में भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक मौके पर देशभर के कई बड़े नेता एक मंच पर नजर आए, जिससे यह कार्यक्रम केवल शपथ ग्रहण नहीं बल्कि राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का मंच बन गया।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। मंच पर पहुंचते ही नेताओं का जोरदार स्वागत किया गया और कार्यकर्ताओं ने ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाए, जिससे पूरा माहौल राजनीतिक जोश से भर गया।
इस दौरान सबसे खास दृश्य वह रहा जब पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले सुवेंदु अधिकारी ने मंच पर पहुंचकर योगी आदित्यनाथ को हाथ जोड़कर प्रणाम किया। इसके जवाब में योगी आदित्यनाथ ने उन्हें भगवा गमछा ओढ़ाकर सम्मानित किया, जिसे राजनीतिक संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी और अन्य वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति ने इसे और भी महत्वपूर्ण बना दिया। मंच पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे।
योगी आदित्यनाथ को मंच पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ आगे की पंक्ति में बैठे देखा गया, जबकि अन्य वरिष्ठ नेता दूसरी पंक्ति में मौजूद रहे। कैबिनेट मंत्री संजय निषाद, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य भी मंच पर एक साथ नजर आए।
इस पूरे आयोजन के दौरान राजनीतिक भाषणों में भी तीखे संदेश देखने को मिले। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता ने बदलाव का फैसला लिया है और भाजपा को मौका देकर एक नई दिशा चुनी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले की सरकारों ने राज्य के विकास को पीछे धकेला था।
वहीं उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर जनता के भरोसे ने भाजपा को यह अवसर दिया है। उन्होंने दावा किया कि अब नई सरकार अपने सभी वादों को पूरा करेगी।
कार्यक्रम में यूपी, बिहार, दिल्ली और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के नेताओं की मौजूदगी ने इसे राष्ट्रीय स्तर का राजनीतिक आयोजन बना दिया। नेताओं के बीच तालमेल और मंच पर दिखी एकजुटता ने राजनीतिक संदेश को और मजबूत किया।
कुल मिलाकर यह शपथ ग्रहण समारोह केवल सत्ता परिवर्तन का कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि देश की राजनीति में शक्ति संतुलन और भाजपा की रणनीतिक एकता का बड़ा प्रदर्शन बनकर सामने आया
