झांसी। बुंदेलखंड में लगातार बढ़ते तापमान और कई इलाकों के धीरे-धीरे ‘हॉट आइलैंड’ में बदलने की स्थिति को लेकर झांसी में विभिन्न जिलों की जल सहेलियां एकत्र हुईं। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में बढ़ती गर्मी, जल संकट, प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण और उनके संभावित समाधान पर विस्तार से चर्चा की।
वीरांगना सभागार में आयोजित इस बैठक में झांसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा, छतरपुर, टीकमगढ़ सहित अन्य जिलों की जल सहेलियों ने भाग लिया। बैठक में जल सहेलियों ने कहा कि यदि बुंदेलखंड में इसी तरह तापमान लगातार बढ़ता रहा तो आने वाले समय में यह एक गंभीर आपदा का रूप ले सकता है।
जल सहेलियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याएं साझा करते हुए बताया कि कई स्थानों पर अभी भी जल जीवन मिशन के अंतर्गत पानी की आपूर्ति सुचारू रूप से नहीं हो पा रही है। कई गांवों में केवल कुछ मोहल्लों तक ही पानी पहुंच रहा है जबकि कुछ क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर बनी हुई है। पानी की अनुपलब्धता का सबसे अधिक असर महिलाओं पर पड़ रहा है क्योंकि पानी की व्यवस्था की अतिरिक्त जिम्मेदारी उनके ऊपर आ रही है।
उन्होंने कहा कि बढ़ते जल संकट और सूखते जल स्रोतों के बीच जल जीवन मिशन की योजनाओं को प्रभावी रूप से जमीन पर उतारने के लिए सरकार को जल सहेलियों के साथ संवाद बढ़ाना चाहिए तथा सामुदायिक स्तर पर साझेदारी को मजबूत करना चाहिए।
इस अवसर पर जल सहेली फाउंडेशन के संस्थापक संजय सिंह ने कहा कि जल जीवन मिशन के दूसरे चरण का उद्देश्य समुदाय की भागीदारी बढ़ाना, पंचायतों को सक्रिय बनाना तथा रखरखाव व्यवस्था को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि सामुदायिक सहयोग के बिना यह कार्य संभव नहीं है और जल सहेलियां इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
कार्यक्रम में मौजूद प्रख्यात सिने अभिनेता अरिफ शेटोली ने जल सहेलियों के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि दूर-दराज क्षेत्रों से आकर सामूहिक प्रयासों में भाग लेने की इनकी प्रतिबद्धता समाज के लिए प्रेरणादायक है।
जल सहेली फाउंडेशन की संध्या शर्मा ने कहा कि एक तरफ जल संकट लगातार बढ़ रहा है तो दूसरी ओर जल सहेलियों की जिम्मेदारियां भी बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि इस अभियान में पुरुषों की भागीदारी भी जरूरी है तथा ग्राम स्तर पर VWSC (Village Water and Sanitation Committee) को अधिक सक्रिय बनाने की आवश्यकता है।
बैठक के दौरान कई जल सहेलियों ने क्षेत्रीय समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। जल सहेली संगठन की संयोजक अन्तिम जहा ने कहा कि छोटी नदियों पर अतिक्रमण और जंगलों की कटाई के कारण क्षेत्र में तापमान बढ़ रहा है। हमीरपुर की जल सहेली राजकुमारी ने बेतवा नदी क्षेत्र में हो रहे खनन को जल संकट का कारण बताया, जबकि महोबा की जल सहेली भारती ने पहाड़ों के लगातार टूटने से बढ़ती गर्मी पर चिंता व्यक्त की।
जालौन की जल सहेली माया ने यमुना संरक्षण के लिए हाल ही में की गई 500 किलोमीटर की पदयात्रा का उल्लेख करते हुए सरकार से नदी संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
कार्यक्रम के अंत में जल सहेलियों ने संकल्प लिया कि वे गांव-गांव में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और जल जीवन मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जागरूकता अभियान चलाएंगी। साथ ही भविष्य में बुंदेलखंड में महिलाओं के नेतृत्व में जल एवं सिंचाई संसाधनों के प्रबंधन हेतु एक महिला इरिगेशन कोऑपरेटिव स्थापित करने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।
