भारत–ईरान रिश्तों को बताया प्राचीन और मजबूत
मीडिया से बातचीत में हकीम इलाही ने भारत और ईरान के संबंधों को अत्यंत पुराना और ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच रिश्ते 5000 वर्षों से अधिक पुराने हैं और यह सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से गहरे जुड़े हुए हैं।
उन्होंने भारत की भूमि को शांति, प्रेम और भाईचारे का केंद्र बताते हुए कहा कि यहां से सद्भाव और मानवता का संदेश पूरी दुनिया में फैला है।
सूफी परंपरा को बताया मानवता का संदेश
हकीम इलाही ने सूफी परंपरा की सराहना करते हुए कहा कि यह पूरी दुनिया को प्रेम, सहिष्णुता और भाईचारे का संदेश देती है। उन्होंने दरगाहों को समाज को जोड़ने वाली शक्ति बताया।इस दौरान उन्होंने भारत के दुश्मनों के विनाश के लिए प्रार्थना करने की बात भी कही, जिसे लेकर यह दौरा और भी चर्चा में आ गया है।
ईरानी मूल के सूफी संत से जुड़ा ऐतिहासिक स्थल
किछौछा दरगाह 14वीं सदी के सूफी संत हजरत सैयद मखदूम अशरफ जहांगीर सेमनानी से जुड़ी हुई है, जिनका जन्म ईरान के सेमनान में हुआ था। उन्होंने भारत आकर यहां अपनी खानकाह स्थापित की थी, जो आज भी सूफी परंपरा का प्रमुख केंद्र मानी जाती है।
सुरक्षा व्यवस्था रही सख्त
दौरे के दौरान प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी। अधिकारियों की मौजूदगी में हकीम इलाही ने दरगाह परिसर का भ्रमण किया और श्रद्धालुओं से भी मुलाकात की।फिलहाल यह दौरा भारत–ईरान सांस्कृतिक संबंधों और सूफी परंपरा के महत्व को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।
