अनाज आधारित स्रोतों में मक्का सबसे बड़ा योगदानकर्ता रहा। अगस्त के अंत तक मक्का से 345 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति की गई। इसके बाद भारतीय खाद्य निगम से प्राप्त अधिशेष चावल का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिससे 214 करोड़ लीटर एथेनॉल तैयार किया गया। इसके अलावा क्षतिग्रस्त खाद्यान्नों से 64 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन हुआ।
उद्योग संगठन के अनुसार, एथेनॉल उत्पादन में मक्का और अधिशेष चावल के बढ़ते इस्तेमाल से उत्पादन व्यवस्था को अधिक स्थिरता मिल रही है। इससे ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलने के साथ किसानों के लिए कृषि उपज के नए उपयोग के अवसर भी बन रहे हैं।
चीनी आधारित स्रोतों की भी एथेनॉल आपूर्ति में अहम भूमिका बनी हुई है। इस श्रेणी में गन्ने के रस से सबसे अधिक 149 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति हुई। बी-हेवी शीरे से 107 करोड़ लीटर और सी-हेवी शीरे से 15 करोड़ लीटर एथेनॉल उपलब्ध कराया गया।
उद्योग के अनुसार, अलग-अलग फीडस्टॉक से एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से देश की आपूर्ति शृंखला अधिक लचीली हो रही है। इससे किसी एक फसल या कच्चे माल पर निर्भरता कम करने में मदद मिलती है। एथेनॉल उत्पादन के लिए कई स्रोतों के इस्तेमाल को देश के कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन की उपमहानिदेशक भारती बालाजी ने कहा कि अब तक आपूर्ति किए गए 895 करोड़ लीटर एथेनॉल में करीब 70 प्रतिशत हिस्सा अनाज आधारित स्रोतों का है। इसमें मक्का और भारतीय खाद्य निगम का अधिशेष चावल प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि, चीनी आधारित स्रोत भी आपूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि विभिन्न फीडस्टॉक के इस्तेमाल से भारत के एथेनॉल कार्यक्रम को मजबूती मिलती है। इससे कृषि उपज का बेहतर इस्तेमाल संभव होता है और उत्पादन से जुड़े जोखिम को कम करने में मदद मिलती है।
हालांकि, उद्योग ने एथेनॉल उत्पादन क्षमता और आपूर्ति बढ़ने के साथ स्थिर और अनुमानित मांग सुनिश्चित करने की जरूरत पर भी जोर दिया है। उद्योग का मानना है कि आने वाले वर्षों में मांग की स्थिरता का मुद्दा और महत्वपूर्ण हो सकता है।
भारत की एथेनॉल खपत का दायरा भी केवल पेट्रोल में मिश्रण तक सीमित नहीं रखने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों, कंप्रेस्ड बायोगैस, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल और अन्य औद्योगिक उपयोगों में एथेनॉल की खपत बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है। ऐसे में उत्पादन के साथ विभिन्न क्षेत्रों में मांग बढ़ाना भी एथेनॉल व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
