उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश की राजनीति में हल्के-फुल्के अंदाज और तीखे तंज का एक दिलचस्प उदाहरण तब देखने को मिला, जब योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर से भाजपा सांसद रवि किशन पर मंच से चुटकी ली। दोनों नेताओं के बीच अक्सर देखने वाली सहज केमेस्ट्री इस बार भी चर्चा का विषय बन गई।
सीएम योगी ने सांसद रवि किशन को मिली पीएचडी की उपाधि पर मजाकिया अंदाज में कहा कि “उपाधि तो मिल गई है, लेकिन आप अपने नाम के आगे प्रोफेसर नहीं लिख सकते। अगर उस डिग्री को लेकर नौकरी मांगने जाएंगे तो नौकरी नहीं मिलेगी, हां उसे गले में टांग सकते हैं।” उनके इस बयान पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच ठहाके गूंज उठे।
दरअसल, रवि किशन को हाल ही में एक मानद पीएचडी उपाधि मिली है, जिसको लेकर यह टिप्पणी की गई। सीएम योगी का यह अंदाज भले ही हल्का-फुल्का था, लेकिन इसमें एक संदेश भी छिपा था कि मानद उपाधियां अकादमिक योग्यता का विकल्प नहीं होतीं।
इतना ही नहीं, सीएम योगी ने रवि किशन के एक हालिया बयान पर भी निशाना साधा। सांसद ने पश्चिम बंगाल को लेकर कहा था कि “4 मई के बाद लोग चार गुना मछली खा सकते हैं।” इस बयान को लेकर पहले ही राजनीतिक हलकों में चर्चा थी। योगी ने उसी पर तंज कसते हुए अप्रत्यक्ष रूप से उन्हें संयमित बयानबाजी की सलाह दी।
दोनों नेताओं के बीच यह संवाद भले ही मजाकिया अंदाज में हुआ हो, लेकिन इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। एक तरफ यह मंचीय हास्य का उदाहरण है, तो दूसरी ओर यह संकेत भी देता है कि पार्टी के भीतर भी बयानबाजी को लेकर सतर्कता जरूरी है।
गौरतलब है कि योगी आदित्यनाथ और रवि किशन के बीच लंबे समय से अच्छे संबंध रहे हैं और दोनों अक्सर सार्वजनिक मंचों पर एक-दूसरे के साथ सहज नजर आते हैं। यही वजह है कि इस तरह की टिप्पणियां विवाद के बजाय हल्के-फुल्के राजनीतिक संवाद के रूप में देखी जा रही हैं।
