काशी के अस्सी घाट पर इस बार विशेष आकर्षण देखने को मिला, जहां 12 राज्यों से लाई गई 5100 साड़ियों (लगभग 25,500 फीट लंबी चुनरी) से मां गंगा का भव्य श्रृंगार किया गया। साथ ही 501 लीटर दूध से गंगा का पारंपरिक अभिषेक कर विशेष पूजा-अर्चना की गई, जिससे पूरा घाट आस्था और श्रद्धा के रंग में रंग गया।
प्रयागराज के संगम तट पर भी सुबह से ही हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा में स्नान कर सूर्य को अर्घ्य दिया और दान-पुण्य किया। अनुमान के अनुसार, सुबह तक लाखों श्रद्धालु संगम में डुबकी लगा चुके थे। वहीं अयोध्या के सरयू घाट पर भी भक्तों की भीड़ देखी गई, जहां लोग स्नान के बाद मंदिरों में पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन में शामिल हुए।
काशी के दशाश्वमेध घाट पर शाम को होने वाली भव्य गंगा आरती को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। दीपों से सजे घाट और गूंजते मंत्रों के बीच पूरा वातावरण दिव्य और देव दिवाली जैसा प्रतीत होने की उम्मीद है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान और पूजन का विशेष महत्व होता है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, इस बार यह पर्व विशेष योगों और मुहूर्तों में पड़ने से इसका फल कई गुना अधिक फलदायी माना जा रहा है।
आचार्यों का कहना है कि मां गंगा के अवतरण दिवस पर किया गया स्नान, दान और पूजन व्यक्ति के सभी पापों का नाश करने वाला माना जाता है, इसी कारण सुबह से ही देशभर से श्रद्धालु बड़ी संख्या में इन तीर्थ स्थलों पर पहुंचे हैं।
फिलहाल पूरे प्रदेश में गंगा दशहरा का पर्व आस्था, श्रद्धा और उत्साह के साथ भव्य रूप से मनाया जा रहा है।
