नई दिल्ली। भारत (India) के पूर्वोत्तर राज्य मेघालय (Northeastern State Meghalaya) में MDA गठबंधन की सरकार है, जिसने राज्य की 60 में से 51 सीटों को अपने नाम किया है। खास बात है कि इसी गठबंधन में भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) और UDP यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी भी है। राजनीतिक उठा पटक ऐसी हुई कि UDP जो गठबंधन की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी थी, अब घटकर महज 1 विधायक पर आ गई है। वहीं, भाजपा बढ़कर दहाई के आंकड़े पर आ गई है। विस्तार से समझते हैं।
एक गठबंधन है MDA, जिसकी अगुवाई नेशनल पीपुल्स पार्टी कर रही है। राज्य में एनपीपी के पास कुल 33 विधायक हैं। वहीं, पाला बदलने से पहले यूडीपी के पास सदस्यों की संख्या 12 पर थी। जबकि, भाजपा 2 सदस्यों के साथ थी। अब यूडीपी के 8 विधायक भाजपा में जा चुके हैं, जबकि 3 अन्य एनपीपी में विलय की कोशिशों में लगे हुए हैं।
भाजपा में गए ये 8 विधायक
आठ विधायकों में लखमेन रिम्बुई, पियस मारवेन, किरमेन श्यल्ला, मायरालबॉर्न सिएम, मैथ्यू बियॉन्डस्टार कुर्बाह, ओलन सिंह सुइन, बालाजीद कुपार सिनरेम और सिनशर कुपार रॉय लिंगदोह थाबाह शामिल हैं। इसके साथ ही भाजपा के विधायकों की संख्या 10 पर पहुंच गई थी। ये नेता 23 सितंबर को भाजपा में शामिल हुए थे और दो दिन बाद ही मेघालय विधानसभा को विलय के बारे में जानकारी दी थी। हाल ही में इस विलय को मान्यता दे दी गई है।
NPP में जाने की कोशिश में तीन विधायक
इसके साथ ही यूडीपी के पास महज 4 विधायक बचे थे, जिनमें से तीन एनपीपी में जा रहे हैं। खास बात है कि इसके बाद राज्य में यूडीपी के पास पार्टी अध्यक्ष मेतबाह लिंगदोह के रूप में एक ही विधायक रह जाएंगे, जो राज्य सरकार में मंत्री हैं। राज्य के मुख्यमंत्री कोनराड सांगमा हैं। उनकी पार्टी के विधायकों की संख्या 33 से बढ़कर 36 हो जाएगी।
क्यों बदल रहे हैं पाला
विधायक किरमिन शायला ने कहा, ‘हमारी पांच बड़ी मांगें हैं, जैसे राज्य में कोयला निकालना और MRSSA कानून। केंद्र की सत्ता में बैठी भाजपा जैसी पार्टी इन बातों को सुलझा सकती है। उन्होंने हमें पक्का भरोसा दिया है कि इन मांगों को पूरा किया जाएगा, इसलिए हमने भाजपा में शामिल होने का फैसला लिया है।’
उन्होंने कहा, ‘भाजपा लंबे समय से राज्य विधानसभा में दो अंकों की संख्या में अपनी मौजूदगी चाहती थी। अब जब बीजेपी के पास 10 विधायक हैं, तो इससे न केवल पार्टी को बल्कि आम जनता को भी फायदा होगा। आखिरकार लोग काम होते देखना चाहते हैं और अगर भाजपा इसे पूरा कर पाती है, तो लोग पार्टी को और मौके देंगे।’
भाजपा प्रवक्ता एम खारक्रांग ने कहा, ‘पार्टी जो भी हो। राज्य का विकास प्राथमिकता है। समय गुजरने के साथ उन्हें लगा कि मुश्किल से कोई नतीजे मिल रहे हैं और राज्य के लिए काम करना मुश्किल हो रहा है। इसलिए उन्होंने ऐसी पार्टी चुनी, जो केंद्र में भी है। वो लोगों के लिए और भी अच्छे से काम कर सकेंगे।’
NPP में जाने वाले क्या बोले
पश्चिम शिलॉन्ग से विधायक पॉल लिंगदोह एनपीपी में जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यूडीपी में संगठन स्तर पर समस्याएं हैं। उन्होंने कहा, ‘मेघालय पर इसका अच्छा असर होगा। खंडित जनादेश के कारण राज्य को कई बार नुकसान उठाना पड़ा है, जिससे अस्थिरता आई और बार बार सत्ता परिवर्तन हुआ। अब जब हमने एकजुटता बना ली है, तो हालात काफी बेहतर हो जाएंगे।’
UDP ने पार्टी से निकाला
लिंगदोह ने वेस्ट शिलांग के विधायक पॉल लिंगदोह, मावकिरवाट के विधायक रेनिक्टन लिंगदोह टोंगखर और मूकाइआव के विधायक नुजोर्की सुंगोह की पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी। पार्टी ने एक बयान में कहा, ‘आज स्थानीय समाचारों से यह स्पष्ट है कि आप सभी नेशनल पीपुल्स पार्टी में शामिल होने जा रहे हैं। इसलिए यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष के रूप में मुझे प्राप्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए मैं आप तीनों को आज, 19 अक्टूबर 2026 से पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित करता हूं।’
