इस सूची में सबसे ऊपर भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर और पूर्व कप्तान मिताली राज संयुक्त रूप से मौजूद हैं। हरमनप्रीत कौर ने टी20 विश्व कप के 39 मुकाबलों में 726 रन बनाए हैं। उन्होंने 25.03 की औसत से बल्लेबाजी करते हुए एक शतक और चार अर्धशतक जड़े हैं। हरमनप्रीत की कई पारियां भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास में यादगार मानी जाती हैं। लंबे समय से टीम की प्रमुख बल्लेबाज और कप्तान के रूप में उन्होंने बड़े टूर्नामेंटों में लगातार जिम्मेदारी निभाई है।
उधर, भारतीय महिला क्रिकेट की सबसे सफल कप्तानों में शामिल मिताली राज ने भी टी20 विश्व कप में 726 रन बनाए हैं। उन्होंने 24 मैचों में 40.33 की शानदार औसत से बल्लेबाजी करते हुए पांच अर्धशतक लगाए। मिताली की बल्लेबाजी की सबसे बड़ी खासियत उनकी निरंतरता रही, जिसने वर्षों तक भारतीय टीम को मजबूती प्रदान की। टी20 विश्व कप में उनके नाम 79 चौके दर्ज हैं, जो उनकी तकनीकी दक्षता और भरोसेमंद बल्लेबाजी को दर्शाते हैं।
तीसरे स्थान पर भारतीय टीम की स्टार ओपनर स्मृति मंधाना हैं। वर्ष 2014 से टी20 विश्व कप का हिस्सा रहीं मंधाना ने 25 मैचों में 524 रन बनाए हैं। इस दौरान उन्होंने चार अर्धशतकीय पारियां खेलीं। अपनी आक्रामक बल्लेबाजी शैली और आकर्षक शॉट्स के लिए प्रसिद्ध मंधाना ने कई मौकों पर भारत को मजबूत शुरुआत दिलाई है। विश्व कप में उनके नाम 65 चौके और 11 छक्के दर्ज हैं।
चौथे स्थान पर जेमिमा रोड्रिगेज हैं, जिन्होंने अपेक्षाकृत कम समय में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। 2018 से 2024 के बीच खेले गए 19 टी20 विश्व कप मुकाबलों में उन्होंने 407 रन बनाए हैं। जेमिमा मध्यक्रम की भरोसेमंद बल्लेबाज के रूप में उभरी हैं और दबाव की परिस्थितियों में उपयोगी पारियां खेलने के लिए जानी जाती हैं। उनकी निरंतर प्रगति भारतीय टीम के भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
इस सूची में पांचवें स्थान पर पूनम राउत का नाम आता है। उन्होंने 2009 से 2014 के बीच 15 मुकाबलों में 375 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से तीन अर्धशतक निकले। पूनम ने उस दौर में भारतीय टीम को मजबूती दी, जब महिला क्रिकेट धीरे-धीरे वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहा था।
इन खिलाड़ियों के योगदान ने महिला टी20 विश्व कप में भारत की पहचान मजबूत की है। आने वाले संस्करणों में हरमनप्रीत कौर और स्मृति मंधाना जैसी खिलाड़ी नए रिकॉर्ड बनाने की ओर बढ़ सकती हैं, जबकि युवा बल्लेबाजों से भी भारतीय क्रिकेट को नई उम्मीदें हैं।
