अंजुम चोपड़ा का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ 170 रन का लक्ष्य पर्याप्त नहीं था। उनके अनुसार यह स्कोर सामान्य परिस्थितियों में अच्छा माना जा सकता है लेकिन विश्व कप जैसे बड़े मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इससे अधिक आक्रामक बल्लेबाजी की जरूरत थी। उन्होंने कहा कि यदि भारतीय टीम को मुकाबला जीतना था तो कम से कम 180 से 190 रन तक पहुंचने की कोशिश करनी चाहिए थी ताकि गेंदबाजों के पास लक्ष्य बचाने के लिए पर्याप्त अवसर मौजूद रहें।
उन्होंने यह भी कहा कि केवल एक या दो शुरुआती विकेट लेकर ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम को दबाव में नहीं लाया जा सकता। ऐसी मजबूत टीमों के खिलाफ गेंदबाजों को अतिरिक्त रन का सहारा चाहिए होता है। भारतीय बल्लेबाजों ने अच्छी शुरुआत के बावजूद अंतिम ओवरों में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई जिसका असर कुल स्कोर पर साफ दिखाई दिया।
अंजुम चोपड़ा ने टीम प्रबंधन के बल्लेबाजी क्रम पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विस्फोटक बल्लेबाज ऋचा घोष को पहले बल्लेबाजी के लिए भेजा जाना चाहिए था। यदि वह 17वें ओवर तक क्रीज पर आ जातीं तो टीम को अंतिम ओवरों में तेज रन बनाने का फायदा मिल सकता था। उनके अनुसार ऋचा को एक ओवर देर से भेजने के कारण भारत को वह फिनिशिंग नहीं मिल सकी जिसकी टीम को जरूरत थी।
उन्होंने बल्लेबाजी क्रम में लगातार बदलाव को भी हार की बड़ी वजह बताया। अंजुम ने सवाल उठाया कि यदि यास्तिका भाटिया को नंबर तीन बल्लेबाज माना गया था तो इस अहम मुकाबले में उन्हें उसी स्थान पर क्यों नहीं उतारा गया। इसी तरह इंग्लैंड सीरीज में नंबर तीन पर खेलने वाली जेमिमा रोड्रिग्स की भूमिका भी विश्व कप में बदल दी गई। उनका मानना है कि लगातार बदलाव से खिलाड़ी अपनी भूमिका को लेकर पूरी तरह सहज नहीं हो पाते और इसका असर प्रदर्शन पर दिखाई देता है।
पूर्व कप्तान ने सुझाव दिया कि हरमनप्रीत कौर को नंबर तीन पर बल्लेबाजी करनी चाहिए जबकि ऋचा घोष को नंबर चार पर स्थायी भूमिका दी जानी चाहिए। उनके अनुसार भारतीय टीम की सबसे बड़ी ताकत बल्लेबाजी है जबकि गेंदबाजी अभी भी उतनी मजबूत नहीं मानी जाती। इसलिए टीम को अपनी बल्लेबाजी क्षमता का पूरा फायदा उठाना चाहिए और बड़े लक्ष्य खड़े करने की मानसिकता विकसित करनी होगी।
अंजुम चोपड़ा ने पांचवें गेंदबाज की कमी को भी भारत की लगातार बनी हुई समस्या बताया। उनके अनुसार यह कमजोरी पूरे टूर्नामेंट में दिखाई दी और ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम ने इसका पूरा फायदा उठाया।
हालांकि उन्होंने कप्तान हरमनप्रीत कौर का खुलकर समर्थन किया। अंजुम ने कहा कि मौजूदा समय में भारतीय महिला टीम के पास हरमनप्रीत से बेहतर कप्तानी का विकल्प नहीं है। उन्होंने माना कि टीम को बल्लेबाजी से लेकर गेंदबाजी और रणनीति तक कई क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है लेकिन नेतृत्व के मामले में हरमनप्रीत अभी भी सबसे भरोसेमंद विकल्प हैं।
पूर्व कप्तान ने कहा कि भारतीय टीम को अब अगले टूर्नामेंट की तैयारी तुरंत शुरू करनी चाहिए और ऐसे बल्लेबाजों की पहचान करनी चाहिए जो निडर होकर बड़े शॉट खेल सकें। उनका मानना है कि आधुनिक टी20 क्रिकेट में केवल सम्मानजनक स्कोर नहीं बल्कि मैच जिताने वाले बड़े लक्ष्य बनाने की सोच ही सफलता की कुंजी है।
