सूत्रों के अनुसार, ICC की इस बैठक में सबसे बड़ा और चर्चित प्रस्ताव टेस्ट क्रिकेट से जुड़ा हुआ है। इसमें सुझाव दिया गया है कि यदि मैच के दौरान खराब रोशनी या मौसम के कारण फ्लडलाइट्स का उपयोग करना पड़े, तो दोनों टीमों की सहमति से लाल गेंद की जगह गुलाबी गेंद का इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि यह नियम लागू होता है तो टेस्ट क्रिकेट के पारंपरिक स्वरूप में यह एक ऐतिहासिक बदलाव माना जाएगा, जहां एक ही मैच में दो अलग-अलग गेंदों का उपयोग संभव होगा।
इसके अलावा वनडे क्रिकेट को लेकर भी एक नया प्रस्ताव सामने आया है। इसके तहत ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान अब मुख्य कोच को मैदान पर जाकर खिलाड़ियों से सीधे रणनीतिक बातचीत करने की अनुमति मिल सकती है। अभी तक यह सुविधा केवल सब्स्टीट्यूट खिलाड़ियों तक सीमित है, लेकिन नए नियम से टीम मैनेजमेंट की भूमिका और अधिक सक्रिय हो सकती है।
टी20 क्रिकेट को और अधिक तेज और रोमांचक बनाने के लिए ICC एक और बदलाव पर विचार कर रही है। प्रस्ताव के अनुसार, पारी के बीच मिलने वाले 20 मिनट के ब्रेक को घटाकर 15 मिनट किया जा सकता है। इससे खिलाड़ियों को कम समय में रणनीति बनानी होगी और मैच की गति और अधिक तेज हो जाएगी।
सिर्फ इतना ही नहीं, गेंदबाजों के संदिग्ध एक्शन यानी ‘चकिंग’ को लेकर भी ICC सख्ती बरतने की तैयारी में है। प्रस्ताव है कि ऑन-फील्ड अंपायरों को हॉक-आई डेटा का उपयोग करने की अनुमति दी जाए, जिससे मैच के दौरान ही गेंदबाजी एक्शन की जांच संभव हो सके। इससे लंबे समय से चल रहे विवादों और देरी को काफी हद तक कम करने में मदद मिल सकती है।
इन सभी प्रस्तावों पर पहले ही ICC की चीफ एग्जीक्यूटिव कमेटी (CEC) की वर्चुअल बैठक में चर्चा हो चुकी है, जिसमें ICC क्रिकेट कमेटी के चेयरमैन और पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली भी शामिल रहे। अब सभी की निगाहें अहमदाबाद बैठक पर हैं, जहां इन बदलावों पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।
यदि यह प्रस्ताव मंजूर होते हैं, तो 1 अक्टूबर 2026 से क्रिकेट का पूरा स्वरूप एक नए युग में प्रवेश कर सकता है।
