नई दिल्ली। भारत (India) की शर्मिला धनखड़ (Sharmila Dhankhar) ने सोमवार को इतिहास रचते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स (Commonwealth Games) में देश के लिए पहला पैरा एथलेटिक्स गोल्ड मेडल (Para-athletics gold medal) जीत लिया. उन्होंने ग्लासगो में महिलाओं की शॉट पुट F57 स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया. शर्मिला ने 9.81 मीटर का सीजन का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया।
शर्मिला के गोल्ड मेडल के साथ ही भारत का पैरा एथलेटिक्स में कॉमनवेल्थ गेम्स के पदक का 20 साल का इंतजार भी खत्म हो गया. शर्मिला के गोल्ड मेडल ने भारत को इन खेलों में दूसरा गोल्ड दिलाया है।
इसी स्पर्धा में भारत की एक अन्य खिलाड़ी शिल्पा शायला ने ब्रॉन्ज मेडल जीता. हालांकि, शिल्पा का पदक बेहद नाटकीय घटनाक्रम के बाद पक्का हुआ. शिल्पा ने 7.26 मीटर का अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था और शुरुआत में वह चौथे स्थान पर रही थीं. वहीं नाइजीरिया की यूचेरिया इयियाजी को शुरुआत में ब्रॉन्ज मेडल दिया गया था।
हालांकि, भारत की ओर से की गई आपत्ति के बाद आधिकारिक समीक्षा हुई और नाइजीरियाई खिलाड़ी के एकमात्र वैध थ्रो को फाउल करार दिया गया. इसके बाद शिल्पा को चौथे स्थान से तीसरे स्थान पर अपग्रेड करते हुए ब्रॉन्ज मेडल दिया गया.
मेडल मिलने के बाद शिल्पा भावुक हो गईं और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े. उन्होंने शर्मिला के साथ मिलकर इस ऐतिहासिक उपलब्धि का जश्न मनाया. हालांकि, नाइजीरिया की ओर से इस फैसले के खिलाफ काउंटर प्रोटेस्ट किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है.
बता दें कि F57 वर्गीकरण उन पैरा एथलीटों के लिए है, जिनके निचले अंगों में दिव्यांगता, अंगों की कमी या मांसपेशियों की ताकत में कमी होती है. शर्मिला को दो साल की उम्र में बाएं पैर में पोलियो हो गया था. उन्होंने इसी साल फाजा इंटरनेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी गोल्ड मेडल जीता था. वह 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में भी हिस्सा ले चुकी हैं, जहां वह चौथे स्थान पर रही थीं.
वल्लूरी अजय बाबू ने वेटलिफ्टिंग में जीता सिल्वर
भारत के पदक अभियान में वल्लूरी अजय बाबू ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों की 79 KG वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता. उन्होंने कुल 330 किलो ग्राम वजन उठाया और गोल्ड मेडल से महज एक किलोग्राम से चूक गए. मलेशिया के एरी हिदायत मुहम्मद ने 331 किलो ग्राम के कुल वजन के साथ स्वर्ण पदक जीता.
वल्लूरी अजय बाबू की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने अपने पिता श्रीनिवास राव की उपलब्धि को एक कदम आगे बढ़ाया है. उनके पिता ने 2010 दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुषों की 56 KG वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीता था. अब 16 साल बाद उनके बेटे ने सिल्वर मेडल जीतकर परिवार की पदक परंपरा को आगे बढ़ाया है.
वल्लूरी गोल्ड मेडल के बेहद करीब पहुंचे, लेकिन एरी हिदायत मुहम्मद से सिर्फ एक किलोग्राम पीछे रह गए. मुकाबला आखिरी लिफ्ट तक बेहद रोमांचक रहा और भारतीय खिलाड़ी को रजत पदक से संतोष करना पड़ा. इसी के साथ भारत की कुल पदक संख्या अब 10 हो गई है, जिसमें 2 गोल्ड शामिल हैं।
