क्रेग माइल्स ने जून 2026 में विटैलिटी ब्लास्ट के दौरान ग्लूस्टरशायर के लिए अपना आखिरी मुकाबला खेला था। इसके बाद वह क्रिकेट से दूर हो गए। इस दौरान उन्होंने अपने करियर और मानसिक स्थिति को लेकर काफी विचार किया। लगातार क्रिकेट खेलने के दबाव और खुद से रखी गई ऊंची उम्मीदों ने उनके लिए मुश्किलें बढ़ा दी थीं। आखिरकार उन्होंने महसूस किया कि अब अपनी मानसिक सेहत को नजरअंदाज करके खेल को जारी रखना सही नहीं होगा।
माइल्स ने बताया कि क्रिकेट छोड़ने का निर्णय उनके लिए आसान नहीं था। करियर के शुरुआती दौर में भी उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा था लेकिन तब वह खराब फॉर्म या मुश्किल दौर को खेल का हिस्सा मानकर आगे बढ़ जाते थे। इस बार परिस्थितियां अलग थीं। उन्हें महसूस होने लगा था कि वह उस मानसिक स्थिति में नहीं हैं जहां अपने तय किए हुए स्तर के मुताबिक ट्रेनिंग और प्रदर्शन कर सकें।
तेज गेंदबाज ने अपने करियर में खुद से काफी ऊंचे मानक तय किए थे। जब प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं होता था तो वह अपनी क्षमता पर सवाल उठाने लगते थे। लगातार आत्मसंदेह और मानसिक दबाव ने उनके लिए खेल को पहले जैसा सहज नहीं रहने दिया। ऐसे में उन्होंने क्रिकेट से दूरी बनाने के बजाय पूरी तरह संन्यास लेने का फैसला किया ताकि अपनी सेहत और जिंदगी के दूसरे पहलुओं पर ध्यान दे सकें।
क्रेग माइल्स का घरेलू क्रिकेट करियर शानदार रहा है। उन्होंने महज 16 साल की उम्र में फर्स्ट क्लास क्रिकेट में पदार्पण किया था। इसके बाद उन्होंने ग्लूस्टरशायर के लिए लंबे समय तक बेहतरीन प्रदर्शन किया। 15 साल के करियर में उन्होंने 111 फर्स्ट क्लास मुकाबले 57 लिस्ट ए मैच और 71 टी20 मुकाबले खेले। इन सभी प्रारूपों को मिलाकर उनके नाम कुल 512 विकेट दर्ज हैं। इतनी बड़ी उपलब्धि के बावजूद उन्हें इंग्लैंड की राष्ट्रीय टीम के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने का मौका नहीं मिला।
माइल्स के करियर में वनडे कप और काउंटी चैंपियनशिप जैसे खिताब भी शामिल रहे। संन्यास के समय उन्होंने अपने करियर की उपलब्धियों पर गर्व जताया और कहा कि अब वह इन सफलताओं को पहले से बेहतर नजरिए से देख पा रहे हैं। ग्लूस्टरशायर के क्रिकेट निदेशक जॉन लुईस ने भी उनके फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अपनी परेशानियों के बारे में खुलकर बात करना कमजोरी नहीं बल्कि साहस और मजबूत चरित्र की निशानी है।
क्रेग माइल्स का फैसला यह संदेश भी देता है कि खेल में उपलब्धियां कितनी भी बड़ी क्यों न हों लेकिन मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। 512 विकेट और लंबा घरेलू करियर उनके प्रदर्शन की गवाही देते हैं। अब वह क्रिकेट के मैदान से बाहर एक नई जिंदगी की शुरुआत करेंगे।
