भारतीय मुक्केबाजों का प्रदर्शन इस बार सबसे अधिक चर्चा में रहा। बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अजय सिंह ने कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स के 96 वर्ष के इतिहास में पहली बार भारत ने मुक्केबाजी में सात स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रचा है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय खिलाड़ियों, कोचिंग स्टाफ और सभी सहयोगी संस्थाओं को देते हुए कहा कि भारतीय बॉक्सिंग अब वैश्विक स्तर पर नई पहचान बना चुकी है और आने वाले वर्षों में भारत की चुनौती और मजबूत होगी।
स्वर्ण पदक विजेता मुक्केबाज साक्षी चौधरी ने एयरपोर्ट पर मिले भव्य स्वागत को अविस्मरणीय बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान पूरे देश का है और उनकी सफलता में भारत सरकार, बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया तथा हरियाणा सरकार के सहयोग की बड़ी भूमिका रही है। साक्षी ने अपना स्वर्ण पदक देशवासियों को समर्पित करते हुए कहा कि भविष्य में भी उनका लक्ष्य भारत के लिए अधिक से अधिक पदक जीतना रहेगा। उनके दादा सतपाल सिंह ने कहा कि परिवार को साक्षी पर गर्व है और युवाओं को मेहनत तथा आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए। वहीं परिवार की सदस्य प्रिया ने कहा कि साक्षी की जीत पूरे परिवार के लिए गर्व और खुशी का अवसर है।
भारतीय मुक्केबाज प्रीति पवार ने भी शानदार प्रदर्शन पर खुशी जताते हुए कहा कि सरकार, सेना और खेल संस्थाओं से मिले सहयोग ने खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ाया है। उन्होंने बताया कि अब जल्द ही राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर शुरू होगा जहां एशियन गेम्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी की जाएगी। वहीं अरुंधति चौधरी ने अपनी सफलता का श्रेय भारतीय सेना, आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट और कॉर्प्स ऑफ मिलिट्री पुलिस को दिया। उन्होंने कहा कि सैनिक होने के कारण देश के लिए बेहतर प्रदर्शन करने की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। उनका अगला लक्ष्य उज्बेकिस्तान में होने वाला विश्व कप है।
पुरुषों के 90 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतने वाले नरेंद्र बेरवाल ने कहा कि इस सफलता के पीछे कई महीनों की कठिन तैयारी और विशेष प्रशिक्षण शिविरों का योगदान है। उन्होंने बताया कि अब पूरा ध्यान एशियन गेम्स की तैयारी पर रहेगा। दूसरी ओर पैरा एथलीटों ने भी शानदार प्रदर्शन कर देश का मान बढ़ाया। पुरुष शॉट पुट एफ 57 वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाले सोमन राणा ने कहा कि यह पदक पूरे देश और भारतीय सेना को समर्पित है। महिला शॉट पुट एफ 57 वर्ग की स्वर्ण पदक विजेता शर्मिला धनखड़ ने इसे अपने जीवन का सबसे बड़ा सम्मान बताया और सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई सुविधाओं के लिए आभार व्यक्त किया।
पैरा एथलीट सुवर्णा राज ने विश्वास जताया कि भारत आने वाले वर्षों में खेलों की महाशक्ति बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वहीं पदक विजेता शुभम जुयाल ने कहा कि हर खिलाड़ी का सपना देश के लिए पदक जीतना होता है और अब चार वर्ष बाद भारत में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए तैयारी का नया दौर शुरू होगा। खिलाड़ियों के जोश और आत्मविश्वास ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय खेलों का भविष्य लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।
