नए नियमों के अंतर्गत सबसे कठोर प्रावधान अनुचित गेंदबाजी प्रथाओं को रोकने के संदर्भ में किया गया है। यदि कोई भी गेंदबाज जानबूझकर फ्रंट फुट नो-बॉल फेंकता हुआ या बल्लेबाज के शरीर को निशाना बनाते हुए खतरनाक बीमर डालता हुआ पाया जाता है, तो अंपायर उसे केवल वर्तमान पारी से ही नहीं, बल्कि पूरे मैच से तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर देंगे। पूर्ववर्ती व्यवस्था के तहत ऐसे मामलों में गेंदबाज को केवल उस विशिष्ट पारी में गेंदबाजी करने से रोका जाता था और वह मैच में क्षेत्ररक्षण के साथ-साथ अगली पारी में गेंदबाजी के लिए पात्र रहता था। बोर्ड का मानना है कि इस कदम से खेल में दुर्भावनापूर्ण व्यवहार पर पूर्ण विराम लगेगा और मैदान पर खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।
प्रथम श्रेणी एवं बहु-दिवसीय मैचों के संचालन को लेकर भी एक अत्यंत महत्वपूर्ण नीतिगत संशोधन किया गया है। अब दिन के अंतिम ओवर के दौरान यदि किसी भी गेंद पर विकेट का पतन होता है, तो खेल को उस समय स्थगित करने के बजाय ओवर की शेष गेंदों का खेल पूरा कराया जाएगा। इसके तहत नए बल्लेबाज को मैदान पर आकर अंतिम गेंदों का सामना करना अनिवार्य होगा, जिससे दिन के निर्धारित ओवरों की शत-प्रतिशत पूर्ति संभव हो सकेगी। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य समय के अपव्यय को रोकना और खेल की निरंतरा को बनाए रखना है।
सीमित ओवरों के प्रारूप में कप्तानों और विकेटकीपरों की सहूलियत तथा तकनीकी स्पष्टता के लिए भी विशेष रियायतें दी गई हैं। एकदिवसीय मैचों में अब ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान कप्तान मैदान के भीतर प्रवेश कर अपने खिलाड़ियों के साथ सामरिक रणनीतियों पर सीधा विचार-विमर्श कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त, विकेटकीपरों द्वारा दस्तानों की स्थिति को लेकर उत्पन्न होने वाले तकनीकी विवादों को समाप्त करने के लिए यह स्पष्ट किया गया है कि गेंदबाज द्वारा गेंद छोड़ने के सटीक क्षण तक ही दस्ताने स्टंप्स के पीछे होना अनिवार्य है। बोर्ड का यह समग्र प्रयास भारतीय घरेलू क्रिकेट के ढांचे को पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय मानकों के समकक्ष स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
