टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की शुरुआत अच्छी नहीं रही और टीम ने महज 7 रन पर पहला विकेट गंवा दिया। इसके बाद कप्तान नेट साइवर-ब्रंट ने पारी को संभालते हुए संयमित बल्लेबाजी की। उन्होंने फ्रेया कैंप के साथ अहम साझेदारी निभाई और टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। साइवर-ब्रंट ने 53 गेंदों में 58 रन की नाबाद पारी खेली, जबकि फ्रेया कैंप ने 28 गेंदों पर 44 रन बनाकर इंग्लैंड का स्कोर 20 ओवर में 4 विकेट पर 150 रन तक पहुंचाया। ऑस्ट्रेलिया की ओर से किम गार्थ, लूसी हैमिल्टन, सोफी मोलिनेक्स और एनाबेल सदरलैंड ने एक-एक विकेट लिया।
151 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलिया की शुरुआत भी साधारण रही और जॉर्जिया वोल सिर्फ 9 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं। इसके बाद बेथ मूनी और फोएबे लिचफील्ड ने दूसरे विकेट के लिए 100 रन की शानदार साझेदारी कर मैच पूरी तरह ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में कर दिया। लिचफील्ड ने 35 गेंदों में 48 रन बनाए, जबकि बेथ मूनी ने 49 गेंदों पर 64 रन की बेहतरीन पारी खेली। एलिस पेरी ने नाबाद 13 रन बनाकर टीम को 17.1 ओवर में जीत की मंजिल तक पहुंचा दिया।
इंग्लैंड की ओर से शार्लेट डीन, लॉरेन बेल और सोफी एक्लेस्टोन को एक-एक विकेट मिला, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों के सामने उनकी गेंदबाजी बेअसर साबित हुई।
फाइनल में मैच जिताऊ पारी खेलने वाली बेथ मूनी को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। पूरे टूर्नामेंट में 7 मैचों में 238 रन बनाने और लगातार शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्हें प्लेयर ऑफ द सीरीज का पुरस्कार भी मिला।
खिताबी जीत के बाद मूनी ने कहा कि टीम ने पूरे टूर्नामेंट में आत्मविश्वास और निडर क्रिकेट खेली। उन्होंने कोचिंग स्टाफ, साथी खिलाड़ियों और कप्तान सोफी मोलिनेक्स की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि पूरी टीम ने एक-दूसरे का हर परिस्थिति में साथ दिया और इसी एकजुटता का परिणाम विश्व कप ट्रॉफी के रूप में मिला। कप्तान मोलिनेक्स के नेतृत्व की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि उनके शांत स्वभाव और बेहतर फैसलों ने टीम को पूरे अभियान में मजबूती दी।
इस जीत के साथ ऑस्ट्रेलिया ने महिला टी20 विश्व कप में अपना दबदबा एक बार फिर साबित कर दिया और रिकॉर्ड सातवीं बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।
