नई तकनीक के तहत पारंपरिक टोल प्लाजा की तरह बैरियर नहीं होंगे। इसकी जगह ओवरहेड स्ट्रक्चर पर लगे हाई-टेक कैमरे और सेंसर गाड़ियों की पहचान करेंगे। FASTag और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक के जरिए वाहन की जानकारी तुरंत पढ़ी जाएगी और टोल की रकम सीधे लिंक्ड खाते से कट जाएगी।
खास बात यह है कि अगर किसी वाहन में FASTag नहीं लगा है या काम नहीं कर रहा, तो भी टोल वसूली नहीं रुकेगी। AI कैमरे नंबर प्लेट स्कैन कर वाहन मालिक को ई-नोटिस भेज देंगे, जिससे भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।
सरकार का दावा है कि इस नई व्यवस्था से हाईवे पर लगने वाले जाम में बड़ी कमी आएगी। वाहनों को रुकना नहीं पड़ेगा, जिससे यात्रा समय घटेगा और ईंधन की भी बचत होगी। साथ ही प्रदूषण में कमी और टोल संचालन में पारदर्शिता बढ़ेगी।
मंत्री गडकरी ने कहा कि यह अत्याधुनिक सिस्टम देश में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को नई गति देगा। उनका कहना है कि आने वाले समय में इस तकनीक को देश के अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी लागू किया जाएगा।
इस पहल को भारत के टोल सिस्टम के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जो आम लोगों के सफर को ज्यादा तेज, सुविधाजनक और झंझटमुक्त बना सकता है।
