मामला तब खुला जब एक कारोबारी को पता चला कि उनके आधार से लिंक मोबाइल नंबर बदल चुका है। जांच में सामने आया कि यह कोई साधारण गड़बड़ी नहीं बल्कि एक सुनियोजित साइबर फ्रॉड था। आरोपियों ने पहले आधार रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर अपना नंबर जोड़ लिया, जिससे OTP सीधे उनके पास पहुंचने लगे। इसके बाद उन्होंने बैंकिंग ऐप्स और DigiLocker जैसे संवेदनशील प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच बना ली और KYC डिटेल्स बदलकर पूरा कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया।
इस ठगी की सबसे खतरनाक कड़ी AI का इस्तेमाल है। ठगों ने पीड़ित की फोटो से छोटे-छोटे वीडियो क्लिप तैयार किए, जो बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन सिस्टम को धोखा देने के लिए इस्तेमाल हुए। यानी अब सिर्फ OTP ही नहीं, बल्कि फेस वेरिफिकेशन भी सुरक्षित नहीं रहा। यही वजह है कि इस तरह के फ्रॉड को बेहद एडवांस और खतरनाक माना जा रहा है।
ठग यहीं नहीं रुके—उन्होंने e-KYC के जरिए कई बैंक अकाउंट खोलने की कोशिश की और Jio Payments Bank से पीड़ित के नाम पर लोन तक ले लिया। जांच में यह भी सामने आया कि आधार अपडेट किट, जो आमतौर पर कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) में इस्तेमाल होती है, उसका भी दुरुपयोग किया गया।
ऐसे मामलों से साफ है कि साइबर अपराधी अब टेक्नोलॉजी का बेहद चालाकी से इस्तेमाल कर रहे हैं। अगर आपके मोबाइल पर OTP, KYC या आधार अपडेट से जुड़ा कोई संदिग्ध मैसेज आए या अचानक सेवाएं बंद हो जाएं, तो तुरंत सतर्क हो जाएं। ऐसी स्थिति में 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें, साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें और अपने बैंक से तुरंत संपर्क कर अकाउंट सुरक्षित करें। सावधानी ही इस नए AI स्कैम से बचने का सबसे मजबूत हथियार है।
