PTA के मुताबिक यह फैसला सिम कार्ड वितरण प्रक्रिया पर कड़ी निगरानी रखने और फर्जी पहचान के जरिए जारी होने वाले सिम कार्ड को रोकने के लिए लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिम कार्ड जारी होने और उनका दुरुपयोग होने की शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद यह कदम उठाया गया है।
नए नियमों के तहत सभी सेलुलर मोबाइल ऑपरेटर्स (CMOs) को सख्ती से निर्देश दिया गया है कि वे इस समय सीमा का पालन करें। यदि कोई ऑपरेटर या रिटेलर नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ टेलीकॉम कानूनों के तहत कड़ी कानूनी और रेगुलेटरी कार्रवाई की जाएगी।
PTA ने नागरिकों को भी सलाह दी है कि वे केवल अधिकृत आउटलेट से ही सिम कार्ड खरीदें और नए सिम को एक्टिवेट करने से पहले बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन जरूर पूरा करें। साथ ही शिकायत दर्ज कराने के लिए हेल्पलाइन और डिजिटल प्लेटफॉर्म भी जारी किए गए हैं।
भारत की बात करें तो यहां सिम बिक्री पर इस तरह का समयबद्ध प्रतिबंध नहीं है, लेकिन फर्जी सिम और साइबर क्राइम पर रोक के लिए डिजिटल सिस्टम को मजबूत किया गया है। भारत में ‘संचार साथी’ पोर्टल के जरिए लाखों संदिग्ध और फर्जी सिम कार्ड की पहचान कर उन्हें ब्लॉक किया जा चुका है, जिससे साइबर फ्रॉड पर काफी हद तक नियंत्रण पाया गया है।
