सर्वे में सामने आया कि उच्च आय वाले कई देशों में सोशल मीडिया के लोकतंत्र पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता अधिक है। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड जैसे देशों में आधे से अधिक लोगों का मानना है कि सोशल मीडिया लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा रहा है। अमेरिका में 64% वयस्कों ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक माना। वहीं, फ्रांस में 65%, जर्मनी में 61%, ब्रिटेन में 56% और कनाडा में 55% लोगों ने सोशल मीडिया के प्रभाव को नुकसानदेह बताया। इन देशों में इसे फायदेमंद मानने वालों का अनुपात क्रमशः 31%, 37%, 41% और 40% रहा।
भारत में सोशल मीडिया और इंटरनेट के फायदे तथा नुकसान को लेकर लोगों ने अलग-अलग राय जाहिर की। 66% भारतीयों ने माना कि इससे ताजा घटनाओं की जानकारी मिलती है। वहीं 55% लोगों ने इसे राजनीति में अपनी आवाज बुलंद करने का साधन माना। इसके साथ ही 62% भारतीयों का मानना है कि सोशल मीडिया के जरिए लोगों को गुमराह करना आसान होता है। 51% लोगों ने राजनीतिक विचारों के आधार पर विभाजन को इसके प्रभाव से जुड़ी समस्या माना। इस तरह भारत में सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर फायदे और नुकसान दोनों पक्षों को लेकर राय सामने आई।
अन्य देशों में भी सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर अलग-अलग तस्वीर देखने को मिली। पाकिस्तान में 62% लोगों ने इसे फायदेमंद और 33% ने नुकसानदेह माना। बांग्लादेश में 67% लोगों ने इसे अच्छा, जबकि 28% ने बुरा बताया। श्रीलंका में 54% लोगों ने सोशल मीडिया के प्रभाव को सकारात्मक माना और 35% ने नकारात्मक। जापान में 48% लोगों ने इसे फायदेमंद तथा 43% ने नुकसानदेह माना। इन आंकड़ों से अलग-अलग देशों में सोशल मीडिया और लोकतंत्र के संबंध को लेकर लोगों की राय में अंतर दिखाई देता है।
सर्वे के व्यापक नतीजों में एक तरफ सोशल मीडिया को सूचना, जागरूकता और राजनीतिक भागीदारी का माध्यम मानने वाले लोग हैं, तो दूसरी तरफ इसके कारण लोकतंत्र को होने वाले नुकसान की चिंता भी सामने आई है। कुल मिलाकर 37 देशों में हुए सर्वे में सोशल मीडिया को लेकर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की राय दर्ज की गई। भारत में जहां दो-तिहाई लोगों ने इसके प्रभाव को फायदेमंद माना, वहीं लोगों ने गुमराह करने और राजनीतिक आधार पर विभाजन जैसे नुकसान को लेकर भी चिंता जताई।
