कंपनी ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2023 से 2032 के बीच तमिलनाडु में 26,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जाएगा। यह निवेश ह्युंडै द्वारा घोषित कुल 45,000 करोड़ रुपये की दीर्घकालिक निवेश योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस राशि का उपयोग उत्पादन क्षमता बढ़ाने, ईवी इकोसिस्टम विकसित करने और स्थानीय आपूर्ति तंत्र को मजबूत बनाने में किया जाएगा।
ह्युंडै का लक्ष्य अगले पांच से छह वर्षों में स्थानीयकरण का स्तर 82 प्रतिशत से बढ़ाकर 90 प्रतिशत तक पहुंचाना है। कंपनी का मानना है कि अधिक स्थानीय उत्पादन से लागत में कमी आएगी, वैश्विक आपूर्ति बाधाओं का प्रभाव घटेगा और आयातित पुर्जों पर निर्भरता कम होगी। इससे भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
कंपनी तमिलनाडु स्थित आपूर्तिकर्ताओं से खरीदारी का मूल्य भी बढ़ाने जा रही है। अनुमान है कि स्थानीय खरीद में लगभग 4,000 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त वृद्धि होगी। इस विस्तार का सीधा लाभ राज्य के लघु और मध्यम उद्योगों को मिलेगा, जो ऑटोमोबाइल सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसके साथ ही अगले पांच से छह वर्षों में करीब 2,000 नए रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना जताई गई है।
ह्युंडै मोटर इंडिया के प्रबंध निदेशक और मुख्य परिचालन अधिकारी तरुण गर्ग ने कहा कि कंपनी इस वर्ष चेन्नई संयंत्र से दो नए मॉडल लॉन्च करेगी। इनमें आम ग्राहकों के लिए तैयार किया गया पहला इलेक्ट्रिक वाहन भी शामिल होगा। कंपनी का मानना है कि यह कदम भारत में ईवी अपनाने की गति बढ़ाने और व्यापक उपभोक्ता वर्ग तक इलेक्ट्रिक वाहनों की पहुंच सुनिश्चित करने में मददगार साबित होगा।
ह्युंडै पहले ही तमिलनाडु में ईवी बैटरी सब-असेंबली सुविधा स्थापित कर चुकी है। इसके अलावा पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स के स्थानीय उत्पादन को बढ़ाने पर भी काम चल रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य संपूर्ण ईवी उत्पादन श्रृंखला को भारत में विकसित करना है, जिससे देश वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण मानचित्र पर अपनी स्थिति और मजबूत कर सके।
कंपनी ने राज्य सरकार के साथ मिलकर कौशल विकास कार्यक्रमों को भी प्राथमिकता दी है। इस पहल के तहत युवाओं को आधुनिक ऑटोमोबाइल तकनीकों और भविष्य की औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रस्तावित कार्यक्रम 2027 तक शुरू होने की संभावना है और इसका उद्देश्य युवाओं की वैश्विक रोजगार क्षमता को बढ़ाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ह्युंडै का यह निवेश न केवल तमिलनाडु बल्कि पूरे भारतीय ईवी उद्योग के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। स्थानीय उत्पादन, तकनीकी विकास और रोजगार सृजन के जरिए यह पहल भारत को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में सहायक बन सकती है।
