साइबर अपराधी अक्सर लोगों को भरोसे में लेने के लिए फाइल का नाम और उसका रूप ऐसा रखते हैं कि वह देखने में सामान्य लगे। बैंक स्टेटमेंट कुरियर की जानकारी बिजली बिल नौकरी से जुड़ा दस्तावेज या किसी इनाम का नोटिस बताकर PDF या दूसरी फाइल भेजी जा सकती है। कई बार असली खतरा फाइल के अंदर छिपे लिंक या उसके साथ आने वाले निर्देशों में होता है। यूजर जैसे ही जल्दबाजी में फाइल खोलता है या उसमें दिए लिंक पर क्लिक करता है उसे फर्जी वेबसाइट पर पहुंचाया जा सकता है जहां उससे लॉगिन डिटेल या दूसरी संवेदनशील जानकारी मांगी जा सकती है।
सबसे ज्यादा सावधानी APK फाइलों को लेकर बरतनी चाहिए। Android फोन में किसी ऐप को अनजान वेबसाइट से APK के जरिए इंस्टॉल करना जोखिम बढ़ा सकता है। साइबर अपराधी कई बार लोकप्रिय ऐप या किसी जरूरी सेवा के नाम पर नकली APK उपलब्ध कराते हैं। ऐसी फाइल इंस्टॉल होने के बाद अगर यूजर जरूरत से ज्यादा परमिशन दे देता है तो संदिग्ध ऐप फोन की संवेदनशील जानकारी तक पहुंच मांग सकता है। भारत सरकार के Cyber Swachhta Kendra की सलाह भी अनजान स्रोतों से ऐप डाउनलोड करने से बचने और भरोसेमंद ऐप स्टोर का इस्तेमाल करने की है।
ZIP RAR और दूसरी archive फाइलों को भी बिना जांचे नहीं खोलना चाहिए। इन फाइलों के अंदर कई दूसरी फाइलें छिपी हो सकती हैं और साइबर अपराधी इन्हें मैलवेयर पहुंचाने के माध्यम के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं। इसी तरह किसी दस्तावेज के नाम को देखकर ही उस पर भरोसा करना सही नहीं है। सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक हमलावर फाइल का नाम बदलकर उसे सामान्य डॉक्यूमेंट जैसा दिखाने की कोशिश कर सकते हैं। मसलन किसी फाइल के नाम में एक सामान्य एक्सटेंशन के बाद दूसरा संदिग्ध एक्सटेंशन मौजूद हो सकता है।
फोन के Downloads फोल्डर पर भी नजर रखना जरूरी है। कई लोग इंटरनेट या मैसेजिंग ऐप से फाइल डाउनलोड करने के बाद उसे भूल जाते हैं और महीनों तक वह फोन में पड़ी रहती है। अगर ऐसी फाइल संदिग्ध है और उसे खोलने या इंस्टॉल करने की कोशिश की जाए तो जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए समय समय पर डाउनलोड फोल्डर की जांच करें और ऐसी फाइलों को हटा दें जिनका स्रोत पता नहीं है या जिनकी जरूरत नहीं है। किसी संदिग्ध फाइल को खोलने के बजाय उसे सीधे डिलीट करना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है।
फोन को सुरक्षित रखने के लिए सबसे पहले ऑपरेटिंग सिस्टम और ऐप्स को अपडेट रखना चाहिए। अनजान वेबसाइट से APK या दूसरे इंस्टॉलर डाउनलोड करने से बचें। किसी फाइल के साथ अचानक पासवर्ड मांगने वाला पॉपअप संदिग्ध लिंक या ऐप इंस्टॉल करने का निर्देश आए तो तुरंत रुक जाएं। ऐप को कैमरा माइक्रोफोन कॉन्टैक्ट्स SMS या स्टोरेज की परमिशन देने से पहले यह जरूर देखें कि उस ऐप को वास्तव में उस अनुमति की जरूरत है या नहीं। जरूरी दस्तावेजों का सुरक्षित बैकअप भी बनाए रखें ताकि फोन में कोई समस्या आने पर महत्वपूर्ण डेटा पूरी तरह नष्ट न हो।
सबसे जरूरी बात यह है कि केवल फाइल का नाम देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि वह सुरक्षित है। अनजान स्रोत से आई फाइल चाहे कितनी भी जरूरी दिखाई दे उसे खोलने से पहले स्रोत की पुष्टि करना बेहद जरूरी है। साइबर सुरक्षा में थोड़ी सी सावधानी बड़ी परेशानी से बचा सकती है। इसलिए अगली बार WhatsApp ईमेल SMS या किसी वेबसाइट से कोई फाइल फोन में आए तो जल्दबाजी में क्लिक करने के बजाय पहले सोचें कि वह कहां से आई है क्यों आई है और क्या वास्तव में उसकी जरूरत है। यही छोटी सी आदत आपके फोन में मौजूद निजी जानकारी को साइबर अपराधियों की पहुंच से काफी हद तक सुरक्षित रखने में मदद कर सकती है।
