ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम: बिजली नहीं तो भी चलता रहेगा काम
ऑफ-ग्रिड सिस्टम पूरी तरह बैटरी पर आधारित होता है। इसमें सोलर पैनल, इन्वर्टर और बैटरी शामिल होती है। यह सिस्टम उन इलाकों के लिए बेहद उपयोगी है जहां बिजली की सप्लाई नहीं होती या बार-बार कटौती होती है। दिन में बनने वाली सोलर एनर्जी बैटरी में स्टोर हो जाती है, जिसे रात में इस्तेमाल किया जा सकता है। यानी बिजली न होने पर भी आप पंखा, लाइट और छोटे उपकरण आसानी से चला सकते हैं।
ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम: बिजली बिल घटाने का सबसे आसान तरीका
ऑन-ग्रिड सिस्टम सीधे बिजली ग्रिड से जुड़ा होता है और इसमें बैटरी की जरूरत नहीं होती। यह सिस्टम तभी काम करता है जब बिजली सप्लाई मौजूद हो। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें बनने वाली अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजा जा सकता है, जिससे बिजली बिल काफी कम या शून्य तक हो सकता है। हालांकि, बिजली कटने पर यह सिस्टम बंद हो जाता है।
सोलर पैनल के मुख्य प्रकार
सोलर पैनल भी मुख्य रूप से दो तरह के होते हैं मोनोक्रिस्टलाइन और पॉलीक्रिस्टलाइन।
मोनोक्रिस्टलाइन पैनल: एकल सिलिकॉन क्रिस्टल से बने होते हैं, इनकी दक्षता (Efficiency) ज्यादा होती है और कम धूप में भी बेहतर काम करते हैं, लेकिन कीमत अधिक होती है।
पॉलीक्रिस्टलाइन पैनल: कई सिलिकॉन कणों से बने होते हैं, ये सस्ते होते हैं और उन जगहों के लिए बेहतर हैं जहां दिन में ज्यादा धूप मिलती है।
अगर आप लंबी अवधि में बिजली खर्च कम करना चाहते हैं तो अपनी जरूरत और स्थान के अनुसार सही सोलर सिस्टम चुनना बेहद जरूरी है। सही चयन से न सिर्फ बिजली बिल में बड़ी बचत होगी बल्कि आप पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देंगे।
