नई दिल्ली। भारत ने अपनी सामरिक प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूत करते हुए सतह से सतह पर मार करने वाली मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-4 का सफल रात्रिकालीन परीक्षण किया। ओडिशा के चांदीपुर स्थित परीक्षण केंद्र से किए गए इस परीक्षण को स्ट्रैटेजिक फोर्सेस कमांड के नेतृत्व में अंजाम दिया गया। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यूजर ट्रायल के दौरान मिसाइल ने निर्धारित सभी तकनीकी और परिचालन मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया।
4,000 किलोमीटर तक लक्ष्य भेदने में सक्षम
अग्नि-4 दो चरणों वाली और ठोस ईंधन से संचालित बैलिस्टिक मिसाइल है। इसकी अधिकतम मारक क्षमता करीब 4,000 किलोमीटर बताई जाती है। इस क्षमता के कारण यह भारत की लंबी दूरी की रणनीतिक मिसाइल प्रणालियों में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
रात में किए गए इस परीक्षण का उद्देश्य मिसाइल की परिचालन क्षमता और सेना की तैयारियों को परखना था। परीक्षण के दौरान मिसाइल ने निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रदर्शन किया, जिससे इसकी विश्वसनीयता और संचालन क्षमता की पुष्टि हुई।
स्ट्रैटेजिक फोर्सेस कमांड की तैयारी की हुई जांच
अग्नि-4 का यह परीक्षण भारतीय सेना की स्ट्रैटेजिक फोर्सेस कमांड की परिचालन तैयारियों को परखने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे यूजर ट्रायल के जरिए यह सुनिश्चित किया जाता है कि संबंधित मिसाइल प्रणाली वास्तविक परिस्थितियों में अपेक्षित मानकों के अनुरूप काम करने में सक्षम है।
ठोस ईंधन तकनीक से मिलता है फायदा
अग्नि-4 में ठोस प्रणोदक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। ऐसी मिसाइलों को तरल ईंधन वाली प्रणालियों की तुलना में अपेक्षाकृत कम तैयारी समय में लॉन्च किया जा सकता है। यही क्षमता संकट की स्थिति में रणनीतिक प्रतिक्रिया को अधिक प्रभावी बनाती है।
भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को मजबूती
अग्नि-4 का सफल परीक्षण भारत की विश्वसनीय न्यूनतम परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। अग्नि श्रृंखला की मिसाइलें भारत की रणनीतिक सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इस परीक्षण से लंबी दूरी तक सटीक प्रहार करने वाली मिसाइल प्रणालियों के संचालन में भारतीय सेना की क्षमता और तैयारियों को और मजबूती मिली है।
