विदुर नीति के अनुसार मनुष्य के भीतर ऐसे छह अवगुण होते हैं जो उसकी उन्नति के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बनते हैं। इनमें अत्यधिक नींद सुस्ती भय क्रोध आलस्य और हर काम को टालने की आदत शामिल है। ये सभी दोष धीरे धीरे व्यक्ति की कार्यक्षमता को कमजोर कर देते हैं और उसे अपने लक्ष्य से दूर ले जाते हैं। जरूरत से ज्यादा सोने वाला व्यक्ति अपने समय का सही उपयोग नहीं कर पाता जबकि सुस्ती और आलस्य उसे मेहनत करने से रोकते हैं। ऐसे लोग अक्सर अच्छे अवसर भी गंवा देते हैं।
महात्मा विदुर ने भय को भी मनुष्य का बड़ा शत्रु बताया है। डर व्यक्ति के आत्मविश्वास को खत्म कर देता है और वह जीवन में बड़े फैसले लेने से बचता रहता है। दूसरी ओर क्रोध विवेक को नष्ट कर देता है। गुस्से में लिया गया एक गलत निर्णय वर्षों की मेहनत को बर्बाद कर सकता है। इसलिए विदुर नीति संयम और धैर्य को सफलता की सबसे बड़ी कुंजी मानती है।
काम टालने की आदत को भी विदुर ने अत्यंत हानिकारक बताया है। उनका कहना था कि जो कार्य आज किया जा सकता है उसे कल पर छोड़ना व्यक्ति की सबसे बड़ी भूल होती है। समय पर काम पूरा करने वाला व्यक्ति ही आगे बढ़ता है जबकि टालमटोल करने वाला हमेशा अवसर खो देता है। आलस्य और टालमटोल मिलकर इंसान को धीरे धीरे असफलता की ओर धकेल देते हैं।
विदुर नीति केवल इन छह दोषों से सावधान रहने की सलाह नहीं देती बल्कि आत्मा के पतन के तीन सबसे बड़े कारणों का भी उल्लेख करती है। महात्मा विदुर ने काम यानी अनियंत्रित वासना क्रोध और लोभ को नरक का द्वार बताया है। उनका मानना था कि जब मनुष्य इन तीनों अवगुणों के वश में आ जाता है तब वह सही और गलत का अंतर भूलने लगता है। अत्यधिक इच्छाएं व्यक्ति को भटकाती हैं क्रोध उसे विनाश की ओर ले जाता है और लोभ उसे कभी संतुष्ट नहीं होने देता।
लोभ के बारे में विदुर का कहना था कि लालची व्यक्ति चाहे जितना धन या सफलता हासिल कर ले उसे कभी संतोष नहीं मिलता। यही असंतोष उसे गलत रास्ते अपनाने के लिए प्रेरित करता है। इसी प्रकार अनियंत्रित इच्छाएं और क्रोध भी व्यक्ति के चरित्र और सम्मान दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए उन्होंने इन तीनों पर नियंत्रण रखने की सलाह दी।
आज के आधुनिक जीवन में भी विदुर नीति की ये शिक्षाएं बेहद उपयोगी हैं। प्रतिस्पर्धा से भरी दुनिया में यदि व्यक्ति समय का सम्मान करे आलस्य और भय को त्याग दे क्रोध पर नियंत्रण रखे तथा लोभ और अनियंत्रित इच्छाओं से दूर रहे तो वह न केवल सफलता प्राप्त कर सकता है बल्कि मानसिक शांति और संतुलित जीवन भी जी सकता है। महात्मा विदुर की यही सीख आज भी हर व्यक्ति को आत्मविकास और सही जीवन मार्ग की प्रेरणा देती है।
