वास्तु में घर के मुख्य द्वार को खास महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि प्रवेश द्वार घर के वातावरण पर प्रभाव डालने वाला प्रमुख स्थान है। इसलिए इसे साफ सुथरा और व्यवस्थित रखना चाहिए। दरवाजे के आसपास अनावश्यक सामान जूते चप्पल और कबाड़ जमा करने से बचने की सलाह दी जाती है। प्रवेश स्थान पर पर्याप्त रोशनी होना भी जरूरी माना जाता है। वास्तु परंपरा में उत्तर पूर्व और पूर्व दिशा के प्रवेश द्वार को अनुकूल माना गया है हालांकि किसी घर का प्रवेश द्वार दूसरी दिशा में होने का मतलब यह नहीं है कि वहां जरूरी तौर पर कोई समस्या होगी।
रसोई को लेकर भी वास्तु में कई नियम बताए गए हैं। दक्षिण पूर्व दिशा को अग्नि तत्व से जुड़ा माना जाता है इसलिए इस दिशा को रसोई के लिए उपयुक्त माना जाता है। उत्तर पश्चिम को भी कुछ परिस्थितियों में विकल्प माना जाता है। रसोई में चूल्हे और सिंक को बिल्कुल साथ रखने से बचने की सलाह दी जाती है क्योंकि वास्तु में अग्नि और जल को अलग तत्व माना गया है। खाना बनाते समय पूर्व दिशा की ओर मुंह करके खाना बनाना भी कई वास्तु परंपराओं में शुभ माना जाता है। साथ ही रसोई में साफ सफाई और पर्याप्त वेंटिलेशन रखना व्यावहारिक रूप से भी महत्वपूर्ण है।
बेडरूम की बात करें तो मास्टर बेडरूम के लिए दक्षिण पश्चिम दिशा को वास्तु में स्थिरता से जोड़ा जाता है। सोते समय सिर दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर रखने की सलाह भी कई वास्तु परंपराओं में दी जाती है। बेडरूम में अनावश्यक सामान जमा करने से बचना चाहिए और सोने की जगह को शांत तथा व्यवस्थित रखना बेहतर माना जाता है। आईने को सीधे बेड के सामने रखने से बचने की सलाह भी कुछ वास्तु गाइड में दी जाती है।
घर के उत्तर पूर्व हिस्से को भी वास्तु में महत्वपूर्ण माना जाता है। इस हिस्से को हल्का साफ और व्यवस्थित रखने की सलाह दी जाती है। पूजा स्थान को लेकर भी इसी दिशा को कई वास्तु परंपराओं में उपयुक्त माना गया है। घर के बीच के हिस्से में भारी सामान का जमाव कम रखना और आने जाने का रास्ता खुला रखना भी वास्तु आधारित सुझावों में शामिल है।
वास्तु से जुड़े नियमों को अपनाते समय यह समझना भी जरूरी है कि अलग अलग परंपराओं और विशेषज्ञों की सलाह में अंतर हो सकता है। खासकर फ्लैट या किराए के मकान में घर की दिशा बदलना संभव नहीं होता। ऐसे में सफाई रोशनी हवा का बेहतर आवागमन सामान को व्यवस्थित रखना और रास्तों को खुला रखना जैसे आसान उपाय किए जा सकते हैं। ये बदलाव घर को अधिक आरामदायक और व्यवस्थित बनाने में भी मदद करते हैं। इसलिए वास्तु को लेकर डरने के बजाय इसे पारंपरिक मान्यताओं और बेहतर घरेलू व्यवस्था के संदर्भ में समझना ज्यादा उपयोगी हो सकता है।
