मंगलवार व्रत की शुरुआत प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने से होती है। स्नान के बाद स्वच्छ लाल या केसरिया वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल को साफ करके भगवान हनुमान की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद दीपक जलाकर पूजा प्रारंभ करें। हनुमानजी को सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल, गुड़ और चने का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। माना जाता है कि बजरंगबली को सिंदूर अत्यंत प्रिय है, इसलिए सिंदूर अर्पित करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है।
पूजा के दौरान हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और सुंदरकांड का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना गया है। जो लोग पूरा सुंदरकांड नहीं पढ़ सकते, वे कम से कम हनुमान चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ अवश्य करें। धार्मिक मान्यता है कि हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करने से मनोबल बढ़ता है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
व्रत रखने वाले श्रद्धालु दिनभर सात्विक आहार ग्रहण करते हैं। कई लोग निर्जला व्रत भी रखते हैं, जबकि कुछ फलाहार का सेवन करते हैं। इस दिन लहसुन, प्याज, मांसाहार और नशीली वस्तुओं से दूर रहने की सलाह दी जाती है। व्रत का पारण सूर्यास्त के बाद या पूजा सम्पन्न होने के बाद किया जाता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगलवार का व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है जिनकी कुंडली में मंगल दोष हो या जो भूमि, भवन, नौकरी, व्यापार अथवा विवाह संबंधी बाधाओं का सामना कर रहे हों। ऐसा माना जाता है कि श्रद्धापूर्वक व्रत करने से मंगल ग्रह मजबूत होता है और जीवन में सकारात्मक परिणाम मिलने लगते हैं।
मंगलवार के दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है। गरीब और जरूरतमंद लोगों को गुड़, मसूर की दाल, लाल वस्त्र या भोजन का दान करना शुभ माना जाता है। यह पुण्य के साथ-साथ ग्रहों की अनुकूलता बढ़ाने वाला भी माना जाता है।
धार्मिक दृष्टि से मंगलवार का व्रत केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम, अनुशासन और सेवा की भावना को भी मजबूत करता है। श्रद्धा, भक्ति और सच्चे मन से किए गए व्रत-पूजन से भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति, साहस तथा सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।
