आज जलाभिषेक के शुभ मुहूर्त
सावन के पहले दिन भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए कई शुभ समय निर्धारित हैं—
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:36 बजे से 5:24 बजे तक
प्रातः संध्या: सुबह 4:39 बजे से 5:41 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:20 बजे से 1:12 बजे तक
विजय मुहूर्त: शाम 4:28 बजे से 5:29 बजे तक
प्रदोष काल: शाम 5:32 बजे से रात 8:30 बजे तक
पहले दिन बन रहे हैं कई शुभ योग
सावन के आरंभ पर श्रवण नक्षत्र, आयुष्मान योग, शश महापुरुष राजयोग, हंस राजयोग और गुरु-आदित्य राजयोग का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इन योगों में शिव पूजा और जलाभिषेक करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
सावन सोमवार की तिथियां
3 अगस्त – पहला सावन सोमवार
10 अगस्त – दूसरा सावन सोमवार
17 अगस्त – तीसरा सावन सोमवार
24 अगस्त – चौथा सावन सोमवार
ऐसे करें भगवान शिव की पूजा
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद शिवलिंग पर तांबे के पात्र से शुद्ध जल, गंगाजल और कच्चा दूध अर्पित करें। बेलपत्र, धतूरा, भांग, आंकड़े के फूल, शमी के पत्ते, सफेद चंदन, अक्षत और शहद चढ़ाकर धूप-दीप करें। फिर शिव चालीसा, रुद्राष्टकम का पाठ तथा ‘ॐ नमः शिवाय’ या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। अंत में फल, मिठाई या पंचामृत का भोग लगाकर आरती करें।
सावन में क्या करें
– प्रतिदिन शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करें।
– सात्विक भोजन का पालन करें।
– जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और जल का दान करें।
– ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का नियमित जाप करें।
किन बातों से करें परहेज
– मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन और बासी भोजन का सेवन न करें।
– बाल, नाखून और दाढ़ी कटवाने से बचें।
– घर में कलह और किसी का अपमान करने से परहेज करें।
– मन, वचन और कर्म से पवित्रता बनाए रखें।
सावन का धार्मिक महत्व
हिंदू मान्यता के अनुसार सावन भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था, जिसके कारण उनका कंठ नीला पड़ गया और वे ‘नीलकंठ’ कहलाए। विष की ज्वाला शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर जल अर्पित किया था। तभी से सावन में शिवलिंग पर जलाभिषेक की परंपरा चली आ रही है।
