पितृ पक्ष में अन्न दान को विशेष महत्व दिया गया है। गेहूं चावल जौ काले चने और अन्य जरूरत की खाद्य सामग्री का दान किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार अन्न का दान करने से घर में अन्न की कमी नहीं रहती और परिवार में बरकत बनी रहती है। इसलिए श्राद्ध कर्म के साथ जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन या राशन सामग्री देना शुभ माना जाता है।
दूसरे महत्वपूर्ण दानों में काले तिल का नाम लिया जाता है। श्राद्ध और तर्पण की परंपराओं में काले तिल का इस्तेमाल किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काले तिल का दान पितरों की प्रसन्नता के लिए शुभ माना जाता है। तर्पण के दौरान भी इसका विशेष उपयोग किया जाता है।
गौ सेवा को भी पितृ पक्ष से जोड़कर देखा जाता है। सामर्थ्य के अनुसार गौशाला में हरा चारा गुड़ या भूसा दान किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता है कि गौ सेवा से पुण्य की प्राप्ति होती है और पितरों का आशीर्वाद मिलता है। जो लोग गौदान करने में सक्षम नहीं हैं वे गौशाला में जाकर सेवा या चारे का दान कर सकते हैं।
वस्त्र दान भी पितृ पक्ष में किया जाने वाला प्रमुख दान माना जाता है। जरूरतमंद व्यक्ति को धोती कुर्ता गमछा चादर या अन्य उपयोगी कपड़े दिए जा सकते हैं। मान्यता के अनुसार वस्त्र दान से जीवन में सुख और सम्मान की प्राप्ति होती है। हालांकि दान करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि वस्त्र साफ और उपयोग के योग्य हों।
घी और गुड़ का दान भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। पितृ पक्ष में जरूरतमंद लोगों को शुद्ध घी या गुड़ देना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इसे घर में सुख शांति और पारिवारिक सौहार्द से जोड़कर देखा गया है।
सामर्थ्य के अनुसार चांदी या सोने का दान भी किया जा सकता है। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि हर व्यक्ति महंगी धातु का दान ही करे। अपनी क्षमता के अनुसार किया गया दान और जरूरतमंद की सहायता अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके अलावा नमक का दान भी कुछ धार्मिक परंपराओं में शुभ माना गया है। मान्यता है कि इससे नकारात्मकता दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में मदद मिलती है।
पितृ पक्ष में दान करने के समय को लेकर भी विशेष मान्यता है। श्राद्ध कर्म और दान के लिए दोपहर का समय महत्वपूर्ण माना जाता है। कुतप काल को भी श्राद्ध से जुड़े कर्मों के लिए उपयुक्त बताया गया है। हालांकि अलग अलग परंपराओं और स्थानों के अनुसार समय में अंतर हो सकता है इसलिए श्राद्ध या तर्पण की विधि करते समय स्थानीय पंचांग या विद्वान की सलाह लेना उचित रहता है।
कुल मिलाकर पितृ पक्ष केवल दान करने का अवसर नहीं बल्कि पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करने और जरूरतमंदों की मदद करने का समय भी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में श्रद्धा से किया गया अन्न दान काले तिल का दान गौ सेवा वस्त्र दान घी और गुड़ का दान चांदी या सोने का दान तथा नमक का दान विशेष पुण्यकारी माना जाता है।
