कथा के अनुसार एक नगर में शीला नाम की महिला अपने पति के साथ रहती थी। शुरुआत में उसका परिवार सुखी था लेकिन समय के साथ पति गलत संगति में पड़ गया। धीरे धीरे घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी और परिवार में परेशानियां बढ़ती चली गईं। पति के व्यवहार में भी बदलाव आ गया। इन परिस्थितियों से शीला काफी दुखी रहने लगी लेकिन उसने भगवान पर अपना विश्वास नहीं छोड़ा।
एक दिन शीला को एक वृद्ध महिला मिली। उस महिला ने उसके दुख को समझा और उसे शुक्रवार को मां लक्ष्मी का वैभव लक्ष्मी व्रत करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि श्रद्धा और नियम के साथ यह व्रत किया जाता है और व्रत के दौरान मां लक्ष्मी का ध्यान तथा कथा का पाठ किया जाता है। धार्मिक कथा के अनुसार वृद्ध महिला ने शीला को व्रत की विधि और संकल्प के बारे में भी बताया।
शीला ने उनकी बातों को ध्यान से सुना और मां लक्ष्मी के सामने व्रत करने का संकल्प लिया। कथा में बताया जाता है कि जब उसने आंखें खोलीं तो वह वृद्ध महिला वहां नहीं थीं। शीला को विश्वास हुआ कि स्वयं मां लक्ष्मी उसके मार्गदर्शन के लिए उस रूप में आई थीं। इसके बाद उसने श्रद्धा के साथ शुक्रवार का व्रत शुरू किया।
शीला ने सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण किए और पूरे भक्तिभाव से मां लक्ष्मी का पूजन किया। शाम को पूजा के दौरान दीपक जलाया गया और मां को प्रसाद अर्पित किया गया। प्रचलित वैभव लक्ष्मी व्रत कथा में श्री यंत्र और लक्ष्मी के विभिन्न स्वरूपों के पूजन का भी उल्लेख मिलता है। व्रत के दौरान किसी की निंदा या चुगली से बचने और मन को सकारात्मक रखने की बात कही गई है।
कथा के अनुसार शीला ने लगातार श्रद्धा के साथ व्रत किया। धीरे धीरे उसके परिवार की परिस्थितियों में बदलाव आने लगा। पति के व्यवहार में भी सुधार हुआ और उसने मेहनत से काम करना शुरू किया। समय के साथ परिवार में फिर से सुख शांति और आर्थिक स्थिरता आने लगी। शीला का विश्वास मां लक्ष्मी के प्रति और मजबूत हो गया।
प्रचलित मान्यता के अनुसार वैभव लक्ष्मी व्रत को 11 या 21 शुक्रवार तक करने का संकल्प लिया जाता है। अंतिम शुक्रवार को उद्यापन की परंपरा बताई गई है। इस अवसर पर मां लक्ष्मी को खीर या अन्य प्रसाद अर्पित किया जाता है और श्रद्धा के अनुसार महिलाओं या कन्याओं को प्रसाद तथा पूजन सामग्री दी जाती है। अलग अलग परंपराओं में उद्यापन की विधि अलग हो सकती है।
माता लक्ष्मी की यह कथा भक्तों को श्रद्धा धैर्य और अच्छे आचरण का संदेश देती है। धार्मिक मान्यता है कि शुक्रवार को पूरे विश्वास के साथ मां लक्ष्मी का स्मरण और पूजन करने से घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है। भक्त अपनी सामर्थ्य के अनुसार व्रत रखते हैं और माता से परिवार की सुख शांति तथा समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।
