भगवान विष्णु को पीला रंग विशेष रूप से प्रिय माना जाता है। यही वजह है कि उनकी पूजा में पीले फूल पीले वस्त्र और पीले रंग की मिठाई का इस्तेमाल किया जाता है। पूजा के दौरान भगवान विष्णु को पीले फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही भक्त भगवान को पीले चंदन का तिलक भी लगा सकते हैं। धार्मिक मान्यता है कि पीले रंग का संबंध गुरु और ज्ञान से भी है इसलिए विष्णु पूजा में इसका विशेष महत्व बताया गया है।
भगवान विष्णु को केले का फल भी प्रिय माना जाता है। पूजा में केले का भोग लगाया जा सकता है। कई स्थानों पर गुरुवार के दिन भगवान विष्णु के साथ केले के पेड़ की भी पूजा करने की परंपरा है। माना जाता है कि ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और परिवार में सुख समृद्धि का वातावरण मजबूत होता है।
नारायण को पंचामृत का भोग भी अर्पित किया जाता है। दूध दही घी शहद और शक्कर से तैयार पंचामृत को धार्मिक दृष्टि से पवित्र माना जाता है। भगवान विष्णु की पूजा में पंचामृत अर्पित करने के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की परंपरा भी कई घरों में है। इसके अलावा तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय मानी जाती है। विष्णु पूजा में तुलसी दल अर्पित करने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है। मान्यता है कि तुलसी के बिना विष्णु पूजा को कई भक्त अधूरा मानते हैं।
भगवान विष्णु को खीर और पीली मिठाइयों का भोग लगाने की भी परंपरा है। बेसन के लड्डू बूंदी के लड्डू या अन्य सात्विक मिठाइयां श्रद्धा के अनुसार अर्पित की जा सकती हैं। पूजा के बाद इस भोग को प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों में बांटना शुभ माना जाता है।
भगवान विष्णु की पूजा करते समय स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थान को स्वच्छ करें। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर पीले फूल तुलसी दल फल और भोग अर्पित करें। विष्णु मंत्र का जाप करें और भगवान से परिवार की सुख शांति तथा कल्याण की प्रार्थना करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए दिखावे से ज्यादा जरूरी मन की पवित्रता और सच्ची श्रद्धा है।
