भगवान गणेश को सबसे अधिक प्रिय मोदक माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार मोदक ज्ञान और आनंद का प्रतीक है। इसलिए गणेश पूजा में मोदक का भोग लगाने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। यदि घर पर बने ताजे मोदक अर्पित किए जाएं तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। मोदक के साथ लड्डू विशेष रूप से बेसन और बूंदी के लड्डू भी गणपति बप्पा को बेहद प्रिय माने गए हैं।
दूर्वा घास भगवान गणेश की सबसे प्रिय पूजा सामग्री मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि गणेश जी को तीन या इक्कीस दूर्वा की गांठ अर्पित करने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं। दूर्वा चढ़ाने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख शांति का वास बना रहता है। पूजा के समय दूर्वा साफ और ताजी होनी चाहिए।
लाल और पीले रंग के फूल भी गणेश जी को अत्यंत प्रिय हैं। विशेष रूप से लाल गुड़हल और गेंदे के फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इनके साथ सिंदूर चढ़ाने का भी विशेष महत्व बताया गया है क्योंकि सिंदूर गणपति जी को अत्यंत प्रिय है। पूजा के दौरान भगवान को चंदन का तिलक लगाकर सुगंधित पुष्प अर्पित करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
केला नारियल गन्ना अमरूद और मौसमी फल भी भगवान गणेश को अर्पित किए जा सकते हैं। नारियल को समर्पण और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है जबकि केला समृद्धि और शुभता का संकेत देता है। इन फलों का भोग लगाने के बाद प्रसाद के रूप में परिवार के सभी सदस्यों में बांटना शुभ माना जाता है।
गणेश जी की पूजा में शुद्ध घी का दीपक जलाना और धूप अगरबत्ती अर्पित करना भी अत्यंत शुभ माना गया है। पूजा के समय गणेश अथर्वशीर्ष गणपति स्तोत्र या ओम गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होने लगती हैं। बुधवार के दिन विशेष रूप से गणेश जी की आराधना करने का महत्व बताया गया है। इस दिन व्रत रखकर विधिपूर्वक पूजा करने से व्यापार नौकरी शिक्षा और पारिवारिक जीवन में सफलता प्राप्त होती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश केवल भोग और पूजा सामग्री से ही नहीं बल्कि भक्त की सच्ची श्रद्धा और निर्मल भाव से सबसे अधिक प्रसन्न होते हैं। यदि मन में विश्वास सेवा और सद्भाव हो तो साधारण पूजा भी विशेष फल देने वाली मानी जाती है। इसलिए गणपति बप्पा की आराधना पूरी आस्था और सकारात्मक भाव से करें ताकि उनके आशीर्वाद से जीवन में सुख समृद्धि सफलता और मंगल का आगमन हो सके।
