शुक्रवार के दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ सफेद या हल्के रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर या पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें। माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र को स्वच्छ आसन पर स्थापित करें। पूजा स्थल पर घी का दीपक जलाएं और धूप अगरबत्ती अर्पित करें। इसके बाद माता को सफेद पुष्प कमल का फूल यदि उपलब्ध हो तो अवश्य अर्पित करें। चावल हल्दी कुमकुम और अक्षत अर्पित कर श्रद्धा से पूजा करें।
पूजन के दौरान श्री सूक्त कनकधारा स्तोत्र लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनाम या लक्ष्मी मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि समय कम हो तो कम से कम 108 बार ओम श्रीं महालक्ष्म्यै नमः मंत्र का जप अवश्य करें। इसके बाद माता लक्ष्मी की आरती करें और परिवार के सभी सदस्यों को आरती में शामिल करें। माना जाता है कि सामूहिक पूजा से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
व्रत रखने वाले श्रद्धालु दिनभर सात्विक भोजन का पालन करते हैं। कई लोग केवल फलाहार करते हैं जबकि कुछ लोग एक समय बिना लहसुन और प्याज का भोजन ग्रहण करते हैं। व्रत के दौरान क्रोध झूठ अपशब्द और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि माता लक्ष्मी स्वच्छता शांति और सदाचार से प्रसन्न होती हैं इसलिए घर और मन दोनों को निर्मल रखना जरूरी माना गया है।
शुक्रवार के दिन सफेद रंग की मिठाई खीर मखाने की खीर मिश्री बताशे या दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाना शुभ माना जाता है। पूजा के बाद प्रसाद परिवार और जरूरतमंद लोगों में बांटना भी पुण्यदायी माना गया है। यदि संभव हो तो किसी गरीब जरूरतमंद महिला या कन्या को सफेद वस्त्र चावल दूध चीनी या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करें। इससे माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुक्रवार के दिन घर में साफ सफाई बनाए रखना टूटे बर्तन और बेकार वस्तुओं को हटाना तथा शाम के समय मुख्य द्वार पर दीपक जलाना शुभ माना जाता है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है और आर्थिक उन्नति के मार्ग खुलते हैं। इसके साथ ही अनावश्यक खर्च से बचना और आय के साधनों का सम्मान करना भी माता लक्ष्मी की कृपा बनाए रखने का महत्वपूर्ण उपाय माना गया है।
मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा विश्वास और नियमपूर्वक लगातार शुक्रवार का व्रत करता है उसके जीवन में आर्थिक परेशानियां धीरे धीरे दूर होने लगती हैं और परिवार में सुख शांति तथा समृद्धि का वातावरण बनता है। हालांकि धार्मिक आस्था व्यक्तिगत विषय है और इसका पालन श्रद्धा तथा विश्वास के साथ ही करना चाहिए।
