नई दिल्ली| सनातन धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित होता है और बुधवार का दिन विशेष रूप से भगवान गणेश और बुध देव की पूजा के लिए शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति सच्चे मन से इस दिन व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा करता है, उसके जीवन से विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। यही कारण है कि आज के समय में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु बुधवार व्रत का पालन करते हैं।
अगर आप बुधवार व्रत शुरू करने की सोच रहे हैं, तो इसके लिए सबसे शुभ समय किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के पहले बुधवार से माना जाता है। इस दिन विधिवत संकल्प लेकर व्रत की शुरुआत करनी चाहिए। मान्यता है कि व्रत को अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए, इसलिए 7, 11 या 21 बुधवार का संकल्प लेकर ही व्रत शुरू करें। व्रत पूर्ण होने के बाद उद्यापन करना भी जरूरी माना गया है, तभी इसका पूर्ण फल प्राप्त होता है।
बुधवार व्रत की पूजा विधि भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद घर के ईशान कोण में गंगाजल छिड़ककर एक स्वच्छ चौकी स्थापित करें और उस पर हरे रंग का कपड़ा बिछाएं। इस चौकी पर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित कर पंचामृत से उनका अभिषेक करें और बुध देव का ध्यान करें। पूजा के दौरान कुमकुम, हल्दी, चंदन, फूल, सिंदूर आदि अर्पित करें और विशेष रूप से 11 दूर्वा चढ़ाना न भूलें। गणेश जी को मोदक या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं, इसके बाद व्रत कथा सुनें और आरती करें। शाम के समय पुनः पूजा कर सात्विक भोजन ग्रहण करें।
व्रत के दौरान कुछ नियमों का पालन करना बेहद आवश्यक माना गया है। इस दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए और केवल एक समय ही भोजन करना उचित होता है। व्रत में दही, हरी मूंग दाल का हलवा, फल और दूध का सेवन किया जा सकता है। साथ ही इस दिन किसी भी महिला या बेटी का अपमान करने से बचना चाहिए, अन्यथा गणेश जी की कृपा से वंचित रहना पड़ सकता है।
बुधवार व्रत रखने से व्यक्ति को तीव्र बुद्धि, करियर में सफलता, आर्थिक मजबूती और मानसिक शांति का आशीर्वाद मिलता है। इतना ही नहीं, कुंडली में बुध ग्रह के अशुभ प्रभाव भी धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं। आस्था और नियमों के साथ किया गया यह व्रत जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखता है।
