नई दिल्ली। दुनिया अभी कोरोना वायरस और दूसरे संक्रमणों के असर से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई थी कि अब एक और तेजी से फैलने वाला संक्रमण लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। इस वायरस का नाम है Norovirus, जिसे दुनिया के सबसे संक्रामक पेट संबंधी संक्रमणों में गिना जाता है। यह वायरस अचानक उल्टी, दस्त, पेट दर्द और कमजोरी जैसी गंभीर समस्याएं पैदा करता है। हाल ही में कैरेबियन प्रिंसेस क्रूज शिप पर इसके फैलने से 100 से ज्यादा यात्री और क्रू मेंबर बीमार पड़ गए, जिसके बाद यह संक्रमण फिर चर्चा में आ गया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक Norovirus पेट और आंतों में संक्रमण फैलाने वाला बेहद संक्रामक वायरस है। यह खासतौर पर भीड़भाड़ और बंद जगहों में तेजी से फैलता है। स्कूल, अस्पताल, हॉस्टल, नर्सिंग होम और क्रूज शिप जैसी जगहों पर इसके मामले अचानक बढ़ जाते हैं। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने, दूषित खाना खाने या गंदा पानी पीने से यह वायरस आसानी से फैल सकता है।
इस संक्रमण के लक्षण अचानक दिखाई देते हैं। मरीज को तेज उल्टी, बार-बार दस्त, मतली और पेट में मरोड़ की शिकायत होती है। कई लोगों में बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द और ठंड लगने जैसे लक्षण भी देखने को मिलते हैं। डॉक्टरों के अनुसार संक्रमण के 12 से 48 घंटे के भीतर इसके लक्षण नजर आने लगते हैं। आमतौर पर मरीज 1 से 3 दिन में ठीक हो जाता है, लेकिन इस दौरान शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन का खतरा तेजी से बढ़ जाता है।
लगातार उल्टी और दस्त के कारण शरीर तेजी से पानी खोने लगता है, जिससे कमजोरी, चक्कर आना, मुंह सूखना और पेशाब कम होना जैसे संकेत दिखाई देते हैं। छोटे बच्चों में रोते समय आंसू कम आना और अत्यधिक नींद आना भी डिहाइड्रेशन के संकेत माने जाते हैं। यही वजह है कि यह संक्रमण बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक माना जाता है।
अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी Centers for Disease Control and Prevention यानी CDC के मुताबिक हर साल दुनियाभर में करीब 68 करोड़ से ज्यादा लोग इस संक्रमण की चपेट में आते हैं। इनमें बड़ी संख्या पांच साल से कम उम्र के बच्चों की होती है। रिपोर्ट्स के अनुसार हर साल हजारों बच्चों की मौत डिहाइड्रेशन और इलाज की कमी के कारण हो जाती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि Norovirus के कई प्रकार होते हैं, इसलिए एक बार संक्रमित होने के बाद भी व्यक्ति दोबारा इसकी चपेट में आ सकता है। फिलहाल इस वायरस की कोई खास वैक्सीन या दवा उपलब्ध नहीं है। एंटीबायोटिक दवाएं भी इस पर असर नहीं करतीं, क्योंकि यह बैक्टीरिया नहीं बल्कि वायरस से होने वाला संक्रमण है।
इससे बचाव के लिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है। बाहर का दूषित खाना खाने से बचें, हाथों को बार-बार साबुन से धोएं और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से दूरी बनाए रखें। डॉक्टर मरीजों को ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ लेने और पर्याप्त आराम करने की सलाह देते हैं। अगर उल्टी-दस्त लंबे समय तक जारी रहें या शरीर में पानी की कमी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
