एंटासिड ऐसी दवाएं हैं जो पेट में मौजूद अतिरिक्त एसिड को निष्क्रिय करके कुछ समय के लिए जलन और असहजता से राहत देती हैं। अलग-अलग एंटासिड में अलग-अलग सक्रिय तत्व मौजूद हो सकते हैं। कैल्शियम या एल्यूमिनियम आधारित दवाओं के अधिक इस्तेमाल से कुछ लोगों को कब्ज की समस्या हो सकती है, जबकि मैग्नीशियम आधारित दवाओं से दस्त हो सकते हैं। लंबे समय तक या जरूरत से अधिक सेवन करने पर कुछ परिस्थितियों में शरीर के इलेक्ट्रोलाइट संतुलन और किडनी के कामकाज पर भी असर पड़ सकता है।
बार-बार एंटासिड या अन्य एसिड कम करने वाली दवाओं का इस्तेमाल करने वाले लोगों में कुछ पोषक तत्वों के अवशोषण पर भी प्रभाव पड़ सकता है। लंबे समय तक एसिड कम करने वाली दवाओं के इस्तेमाल से कुछ लोगों में विटामिन बी12 या मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों की कमी का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि इसका खतरा दवा के प्रकार, मात्रा, इस्तेमाल की अवधि और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है। इसलिए लंबे समय तक दवा लेने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
रोज खाली पेट एंटासिड लेने की सबसे महत्वपूर्ण समस्या यह है कि इससे बार-बार होने वाली एसिडिटी के वास्तविक कारण की पहचान में देरी हो सकती है। लगातार सीने में जलन या खट्टी डकार गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज यानी जीईआरडी, गैस्ट्राइटिस या पेप्टिक अल्सर जैसी स्थितियों से जुड़ी हो सकती है। ऐसे मामलों में केवल एंटासिड लेकर लक्षणों को दबाते रहना समस्या के उचित मूल्यांकन में देरी कर सकता है।
शुरुआती तौर पर लंबे या बार-बार इस्तेमाल के दौरान कब्ज, दस्त, पेट में असहजता, मतली या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। हालांकि इन लक्षणों का मतलब हमेशा एंटासिड से होने वाला नुकसान नहीं होता और इनके कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। इसी तरह लगातार एसिडिटी बने रहना भी इस बात का संकेत हो सकता है कि दवा समस्या का पर्याप्त समाधान नहीं कर रही है।
एसिडिटी से राहत के लिए खान-पान और दिनचर्या में बदलाव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भोजन कम मात्रा में और नियमित समय पर लेना, बहुत तला-भुना तथा मसालेदार भोजन कम करना, खाने के तुरंत बाद न लेटना और रात में सोने से कुछ घंटे पहले भोजन कर लेना मददगार हो सकता है। अधिक वजन होने की स्थिति में वजन कम करने से भी रिफ्लक्स के लक्षणों में सुधार हो सकता है।
यदि एसिडिटी लगातार कई सप्ताह से बनी हुई है या बार-बार एंटासिड लेने की जरूरत पड़ती है तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। निगलने में कठिनाई, लगातार उल्टी, खून की उल्टी, काला मल, बिना कारण वजन कम होना या तेज सीने का दर्द जैसे लक्षण दिखाई दें तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। एंटासिड कभी-कभार राहत देने वाली दवा हो सकती है, लेकिन रोज खाली पेट इसकी जरूरत पड़ना समस्या के मूल कारण की जांच कराने का संकेत है।
