माचा और सामान्य ग्रीन टी एक ही पौधे कैमेलिया साइनेंसिस से तैयार होती हैं, लेकिन दोनों के इस्तेमाल का तरीका अलग है। ग्रीन टी में पत्तियों को गर्म पानी में भिगोकर उनका अर्क लिया जाता है और बाद में पत्तियां अलग कर दी जाती हैं। वहीं माचा में विशेष तरीके से तैयार की गई चाय की पत्तियों को बारीक पाउडर में बदलकर पानी में मिलाया जाता है। इस वजह से माचा पीने वाले व्यक्ति पूरी पत्ती का सेवन करते हैं।
पूरी पत्ती के सेवन के कारण माचा में कैटेचिन, खासकर ईजीसीजी, कैफीन और अन्य एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड मिल सकते हैं। इन तत्वों को शरीर में ऊर्जा खर्च और फैट ऑक्सीडेशन से जोड़कर देखा गया है। कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में कैटेचिन और कैफीन के संयोजन से ऊर्जा खर्च में मामूली बढ़ोतरी के संकेत मिले हैं। हालांकि इसका प्रभाव इतना बड़ा नहीं माना जाता कि केवल माचा पीने से तेजी से वजन कम हो जाए।
माचा में मौजूद कैफीन और ईजीसीजी शारीरिक गतिविधि के दौरान शरीर द्वारा ऊर्जा के इस्तेमाल और फैट के ऑक्सीडेशन को कुछ हद तक प्रभावित कर सकते हैं। कैफीन सतर्कता बढ़ाने में भी मदद कर सकता है, जिससे कुछ लोगों को व्यायाम के दौरान सक्रिय रहने में सहायता मिल सकती है। इसके अलावा माचा में एल-थियानाइन नामक अमीनो एसिड भी होता है, जो कैफीन के प्रभाव को कुछ हद तक संतुलित करने से जुड़ा माना जाता है।
हालांकि वजन और मेटाबॉलिज्म पर सिर्फ एक पेय का प्रभाव सीमित होता है। शरीर की कैलोरी जरूरत और ऊर्जा खर्च उम्र, आनुवंशिकता, मांसपेशियों की मात्रा, हार्मोन, खान-पान और शारीरिक गतिविधि जैसे कई कारकों पर निर्भर करते हैं। इसलिए माचा को संतुलित डाइट और नियमित व्यायाम का विकल्प नहीं माना जा सकता।
वजन कम करने के लिए लंबे समय तक कैलोरी की जरूरत से कम ऊर्जा लेना, पर्याप्त प्रोटीन और पौष्टिक भोजन करना, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और लगातार स्वस्थ आदतें बनाए रखना ज्यादा महत्वपूर्ण है। यदि कोई व्यक्ति मीठे या अधिक कैलोरी वाले पेय की जगह बिना चीनी वाली माचा टी लेता है, तो इससे कुल कैलोरी सेवन कम करने में मदद मिल सकती है।
माचा की मात्रा को लेकर भी सावधानी जरूरी है। सामान्य स्वस्थ वयस्कों के लिए रोजाना एक से दो सर्विंग सीमित मात्रा में लेना आमतौर पर व्यावहारिक माना जाता है, लेकिन इसमें मौजूद कैफीन को ध्यान में रखना चाहिए। अधिक सेवन से कुछ लोगों में बेचैनी, नींद में परेशानी, सिरदर्द, दिल की धड़कन तेज होने या पाचन संबंधी दिक्कत जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं, हाई ब्लड प्रेशर या हृदय संबंधी समस्या वाले लोगों और नियमित रूप से कुछ दवाएं लेने वालों को माचा को रोजाना की डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है। कुल मिलाकर, माचा एक पौष्टिक पेय का हिस्सा हो सकती है, लेकिन स्वस्थ वजन हासिल करने और बनाए रखने की सफलता किसी एक ड्रिंक पर नहीं, बल्कि संतुलित खान-पान और नियमित जीवनशैली पर निर्भर करती है।
