पाली। पश्चिमी राजस्थान की जीवनरेखा और पाली जिले की पहचान माने जाने वाले जवाई बांध में जल संकट गहराता जा रहा है। 61.25 फीट की भराव क्षमता वाले बांध में पानी का स्तर घटकर 24 फीट से भी नीचे पहुंच गया है। कम होते जलस्तर का असर अब इंसानों के साथ-साथ बांध के जलीय जीवों पर भी दिखाई देने लगा है। जवाई में रहने वाले 500 से ज्यादा मगरमच्छों और लाखों मछलियों के सामने पानी और भोजन का संकट खड़ा हो गया है।
जलस्तर लगातार घटने से मगरमच्छों के लिए तैरने और सुरक्षित स्थानों की उपलब्धता कम होती जा रही है। वहीं, पानी का तापमान बढ़ने से मछलियों के जीवन पर भी असर पड़ रहा है। बड़ी संख्या में मछलियों के मरने की स्थिति में बांध का पानी दूषित होने का खतरा भी बढ़ सकता है। इससे मगरमच्छों के लिए भोजन की उपलब्धता पर भी असर पड़ेगा।
तीन महीने का पानी बचने का दावा
विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा स्थिति में जवाई बांध में करीब तीन महीने का पानी ही बचा है। इसके बाद बांध के डेड स्टोरेज में पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। ऐसी स्थिति में जल संकट का असर केवल मानव आबादी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बांध के पूरे जलीय पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ सकता है।
500 से अधिक मगरमच्छ और बड़ी संख्या में मछलियां जवाई के पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में जलस्तर में और गिरावट आने पर इनके संरक्षण के लिए प्रशासन और वन्यजीव विभाग के सामने चुनौती बढ़ सकती है। समय रहते जल प्रबंधन और वन्यजीवों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले समय में जलीय जीवों के सामने गंभीर संकट पैदा हो सकता है।
मगरमच्छों के लिए मशहूर है जवाई
जवाई बांध और इसके आसपास का क्षेत्र अपनी अनूठी जैव विविधता के लिए जाना जाता है। यहां के तेंदुओं के साथ-साथ विशालकाय मगरमच्छ भी पर्यटकों के प्रमुख आकर्षण हैं। पहाड़ियों से घिरे बांध के पानी और चट्टानी किनारों पर धूप सेंकते मगरमच्छों को देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर पहुंचते हैं।
जवाई क्षेत्र में तेंदुओं और मगरमच्छों का प्राकृतिक सह-अस्तित्व इसकी खास पहचान है। जवाई सफारी के दौरान पर्यटक बांध के उथले पानी और चट्टानों पर मगरमच्छों की गतिविधियों को करीब से देखते हैं। वन्यजीव पर्यटन यहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ऐसे में जवाई बांध का लगातार घटता जलस्तर केवल जल संकट नहीं, बल्कि यहां के वन्यजीव और पूरे जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी चिंता का विषय बन गया है।
