तमिलनाडु में नई सरकार बनने के बाद कांग्रेस और डीएमके के बीच वर्षों पुराना राजनीतिक रिश्ता कमजोर पड़ता नजर आया। बदले राजनीतिक माहौल में कांग्रेस ने नई सत्ता के साथ जाने का फैसला किया, जिससे डीएमके को बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। इसके बाद डीएमके ने विपक्षी गठबंधन से दूरी बनानी शुरू कर दी, जिसने राष्ट्रीय राजनीति में नई अटकलों को जन्म दे दिया।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, बीजेपी अब डीएमके को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के करीब लाने की संभावनाओं पर काम कर रही है। हालांकि औपचारिक गठबंधन को लेकर अभी कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन संसद में मुद्दों के आधार पर समर्थन हासिल करने की रणनीति पर चर्चा तेज बताई जा रही है। माना जा रहा है कि बीजेपी का मुख्य फोकस डीएमके के लोकसभा और राज्यसभा सांसदों के समर्थन पर है, जिससे बड़े संवैधानिक विधेयकों को पारित कराने में मदद मिल सकती है।
संसद में कई महत्वपूर्ण विधेयकों और संवैधानिक संशोधनों के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। ऐसे में केंद्र सरकार की कोशिश है कि भविष्य में “वन नेशन-वन इलेक्शन”, परिसीमन और न्यायिक सुधार जैसे बड़े प्रस्तावों को बिना किसी बड़ी बाधा के पारित कराया जा सके। इसी वजह से राजनीतिक रणनीतिकार उन दलों के समर्थन की संभावनाएं तलाश रहे हैं, जो औपचारिक रूप से गठबंधन का हिस्सा न होते हुए भी मुद्दों के आधार पर सहयोग दे सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डीएमके और बीजेपी की विचारधाराएं कई मुद्दों पर अलग रही हैं, खासकर सनातन धर्म और सांस्कृतिक राजनीति को लेकर। इसके बावजूद वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियां दोनों पक्षों को व्यावहारिक राजनीति की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकती हैं। यह भी याद दिलाया जा रहा है कि अतीत में डीएमके राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा रह चुकी है, इसलिए भविष्य में किसी प्रकार के सहयोग की संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता।
बीजेपी की रणनीति केवल प्रत्यक्ष गठबंधन तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि पर्दे के पीछे समर्थन जुटाने पर भी जोर दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि यदि डीएमके के सांसद संसद में कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार का समर्थन करते हैं, तो केंद्र सरकार को अपने बड़े राजनीतिक और संवैधानिक एजेंडे को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण ताकत मिल सकती है।
तमिलनाडु की राजनीति में आए इस बदलाव ने राष्ट्रीय स्तर पर नए समीकरणों की संभावनाओं को जन्म दिया है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि यह केवल राजनीतिक चर्चा बनकर रह जाती है या फिर भारतीय राजनीति में एक नया गठबंधन अध्याय शुरू होता है।
