मामले की जांच के दौरान ईडी ने कोलकाता और आसपास के पांच अलग अलग ठिकानों पर छापेमारी की। इनमें चार्टर विमान कंपनी के कार्यालय उसके मालिक का आवास न्यू टाउन स्थित एक परिसर एक ट्रस्ट का दफ्तर और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट का कार्यालय शामिल है। कार्रवाई के दौरान एजेंसी ने कई अहम दस्तावेज डिजिटल रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं जिनकी जांच की जा रही है।
जांच एजेंसी के अनुसार वर्ष 2023 से 2026 के बीच तृणमूल कांग्रेस के बैंक खातों से केयरवेल एविएशन नामक चार्टर विमान कंपनी के खाते में करीब 160 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए। इसके बाद इस कंपनी ने करीब 82.96 करोड़ रुपए एक अन्य नई कंपनी को भेजे। ईडी का दावा है कि करीब 112 करोड़ रुपए की राशि का उपयोग एक एम्ब्रेयर लेगेसी जेट 600 विमान और एक अगस्ता वेस्टलैंड 109 एसपी हेलीकॉप्टर खरीदने में किया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि हेलीकॉप्टर की खरीद के लिए वर्ष 2023 में केमैन आइलैंड्स की एक विदेशी कंपनी से कर्ज भी लिया गया था।
सूत्रों के मुताबिक यह चार्टर कंपनी तृणमूल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं की हवाई यात्रा की व्यवस्था करती थी। जांच एजेंसी फिलहाल यह पता लगाने में जुटी है कि विमान और हेलीकॉप्टर खरीद में इस्तेमाल हुई राशि का वास्तविक स्रोत क्या था और इन संसाधनों का उपयोग किन परिस्थितियों में किया गया। इसी वजह से पूरे लेनदेन की फॉरेंसिक जांच भी कराई जा रही है।
इस मामले की शुरुआत भी बेहद दिलचस्प तरीके से हुई। जून महीने में पार्टी के एक विधायक ने साइबर धोखाधड़ी से जुड़े संदिग्ध बैंक खातों की शिकायत दर्ज कराई थी। बाद में पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष ने भी आंतरिक विवाद का हवाला देते हुए पार्टी के बैंक खातों को फ्रीज करने की मांग की। स्थानीय पुलिस की प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपए के संदिग्ध ट्रांजैक्शन सामने आने के बाद मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका के आधार पर मामला ईडी के पास पहुंचा।
दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस ने ईडी की पूरी कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताते हुए सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। पार्टी का कहना है कि जांच एजेंसी विपक्षी दलों को निशाना बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। फिलहाल ईडी 150 करोड़ रुपए से अधिक के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और उससे जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
