मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि विपक्ष पिछले कई दिनों से इस विषय पर चर्चा की मांग कर रहा है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई औपचारिक जवाब सामने नहीं आया है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसे संवेदनशील मामलों पर संसद के भीतर खुली चर्चा होना आवश्यक है। उन्होंने दावा किया कि राज्यसभा के सभापति ने संसदीय कार्य मंत्री को विपक्ष की भावनाओं से गृह मंत्री को अवगत कराने का निर्देश दिया है, जिससे इस विषय पर चर्चा का रास्ता निकल सके।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य केवल राजनीतिक विरोध करना नहीं, बल्कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जानकारी प्राप्त करना है। उन्होंने कहा कि यदि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस या अन्य बल प्रयोग किया है तो यह जानना जरूरी है कि ऐसे कदम उठाने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया था। उनके अनुसार संसद इस प्रकार के मुद्दों पर जवाबदेही तय करने का सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच है और सरकार को यहां विस्तृत स्पष्टीकरण देना चाहिए।
खड़गे ने अपनी पार्टी की ओर से दो प्रमुख मांगों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दें और दूसरी ओर गृह मंत्री अमित शाह सदन में उपस्थित होकर विपक्ष के सवालों का जवाब दें। उनका कहना था कि यदि सरकार इस विषय पर स्पष्ट रुख नहीं अपनाती है तो राजनीतिक विवाद और गहराने की संभावना बनी रहेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष संसद की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाना चाहता है, लेकिन महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचने की स्थिति में गतिरोध समाप्त होना कठिन है। उनके अनुसार लोकतंत्र में संवाद और जवाबदेही दोनों समान रूप से आवश्यक हैं तथा जनता से जुड़े मामलों पर सरकार को पारदर्शी रुख अपनाना चाहिए।
अपने बयान के दौरान खड़गे ने झारखंड में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस छात्रों के हितों और उनके अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर लगातार आवाज उठाती रहेगी। उनका कहना था कि किसी भी राज्य में यदि युवाओं और छात्रों से जुड़े प्रश्न सामने आते हैं तो उन पर निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
जंतर-मंतर की घटना को लेकर संसद में जारी गतिरोध के बीच अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि इस विषय पर सदन में विस्तृत चर्चा होती है तो राजनीतिक दलों के बीच जारी टकराव कम होने की संभावना बन सकती है। फिलहाल विपक्ष अपने रुख पर कायम है और सरकार से आधिकारिक जवाब की मांग लगातार दोहरा रहा है।
