सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि अपराधियों के मन में ऐसा सख्त खौफ पैदा किया जाए कि वे इस तरह के अपराध को दोबारा करने के बारे में सोचने से भी डरें। अदालत ने कहा कि जब तक असामाजिक तत्वों को यह भरोसा नहीं होगा कि ऐसे अपराध करने पर उन्हें बख्शा नहीं जाएगा, तब तक राजधानी की स्थिति में सुधार मुश्किल है। कोर्ट ने पुलिस से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि आने वाले हफ्तों में ऐसी कोई वीभत्स घटना दोबारा न हो।
दक्षिण दिल्ली के एक पार्क में हुए गैंगरेप मामले को लेकर भी अदालत ने पुलिस से तीखे सवाल किए। कोर्ट ने कहा कि घटना से पहले स्थानीय लोगों ने पुलिस को असामाजिक तत्वों के बारे में चेतावनी दी थी। ऐसे में अदालत ने सवाल उठाया कि समय रहते उचित कार्रवाई क्यों नहीं की गई। सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए दिल्ली में एक वॉर रूम बनाने के संबंध में भी जानकारी मांगी और सुरक्षा व्यवस्था को इस स्तर तक मजबूत करने को कहा कि रात 10 बजे सड़क पर चलने वाली महिला भी खुद को सुरक्षित महसूस करे।
अदालत ने यौन अपराधों से जुड़े संदिग्धों पर निगरानी के लिए यौन अपराधियों के राष्ट्रीय डेटाबेस के इस्तेमाल का सुझाव भी दिया। इसके अलावा दिल्ली में मौजूद हजारों अनधिकृत खाने-पीने की जगहों का मुद्दा भी उठाया गया। अदालत के अनुसार, ऐसी जगहों पर अवैध रूप से शराब परोसे जाने और असामाजिक तत्वों के जमा होने की बात सामने आती है। कोर्ट ने इस व्यवस्था पर भी पुलिस का ध्यान आकर्षित किया और सुरक्षा के लिहाज से जरूरी कार्रवाई पर जोर दिया।
जस्टिस पारदीवाला ने वर्ष 2012 के निर्भया मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस वीभत्स घटना से पहले भी दोषियों ने ऐसी ही जगहों पर खान-पान किया था। सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेजों के आसपास मंडराने वाले मनचलों और शोहदों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। अदालत के निर्देशों का मुख्य जोर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस की जमीनी कार्रवाई मजबूत करने, सुरक्षा चूक रोकने और यौन अपराधों की प्रवृत्ति रखने वाले लोगों के बीच कानून का प्रभावी डर पैदा करने पर रहा।
