नई दिल्ली: उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा को लेकर टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सैलजा के आग्रह पत्र के बावजूद हरीश रावत ने सोमवार को भी अपनी यात्रा जारी रखी। इस बीच उन्होंने पार्टी हाईकमान से अपना पक्ष रखने के लिए समय मांगा है। रावत ने कहा कि उनकी यात्रा को गलत समझा जा रहा है और उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल को पहले ही पूरी स्थिति स्पष्ट कर दी थी। यात्रा पहले से तय होने के कारण उन्होंने उनसे माफी भी मांगी थी। कुमारी सैलजा ने कहा है कि रावत अपनी बात रखना चाहते हैं और वह 7 या 8 अक्टूबर को उनसे बात करेंगी।
हरीश रावत की यात्रा को लेकर कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने स्पष्ट कहा था कि राज्य में कोई भी व्यक्तिगत कार्यक्रम बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद सोमवार को रावत ने जसपुर से हल्द्वानी तक धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा निकाली। यात्रा के दौरान कई कांग्रेस नेता और जनप्रतिनिधि उनके साथ दिखाई दिए। कांग्रेस चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष और चकराता विधायक प्रीतम सिंह के रावत की यात्रा के समर्थन में आने से पार्टी के भीतर गुटबाजी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में यात्रा के दौरान जसपुर विधायक आदेश सिंह चौहान, अल्मोड़ा विधायक मनोज तिवारी, धारचूला विधायक हरीश धामी और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद कुंजवाल भी शामिल हुए।
हालांकि काशीपुर में महानगर अध्यक्ष अलका पाल, प्रदेश उपाध्यक्ष अनुपम शर्मा समेत कुछ नेताओं ने यात्रा से दूरी बनाए रखी। इससे पार्टी के भीतर अलग-अलग धड़ों के सक्रिय होने की चर्चा तेज हुई है। रावत ने सोशल मीडिया पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि दिल्ली में उनकी धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा को गलत समझा जा रहा है। उन्होंने कहा कि संभव है कि वह अपनी बात सही तरीके से नहीं समझा पाए हों। प्रदेश प्रभारी ने उन्हें मिलने का समय दिया है और वह वहां अपना स्पष्टीकरण देंगे।
हरीश रावत के मुद्दे को कांग्रेस हाईकमान भी गंभीरता से ले रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार यह मामला राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संज्ञान में भी लाया गया है। उत्तराखंड चुनाव को गंभीरता से ले रही कांग्रेस इस बार किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती। पार्टी के भीतर यह भी आशंका है कि रावत के समर्थन में और नेता सामने आ सकते हैं, जिससे चुनाव से पहले गुटबाजी बढ़ सकती है। इसी वजह से हाईकमान उनके पक्ष को सुनकर ही आगे कोई फैसला लेने के संकेत दे रहा है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि हरीश रावत अपनी बात रखना चाहते हैं और पार्टी पहले उनका पक्ष सुनना चाहती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बातचीत के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा। यह पूछे जाने पर कि यदि रावत यात्रा जारी रखते हैं और पार्टी उनकी दलीलों से सहमत नहीं होती तो क्या उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है, सैलजा ने कहा कि इस बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। वहीं, सोमवार रात करीब आठ बजे यात्रा के हल्द्वानी पहुंचने पर हरीश रावत ने कहा कि उत्तराखंड की धरती पर उन्हें बदलाव की आवाज सुनाई दे रही है। उन्होंने कहा कि 2027 में उत्तराखंड और 2029 में केंद्र में बदलाव होगा और यह बदलाव कांग्रेस लाएगी। स्वराज आश्रम में विधायक सुमित हृदयेश, द्वाराहाट विधायक मदन बिष्ट समेत कई पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया।
