सुबह से ही राजधानी गुवाहाटी में उत्सव जैसा माहौल था। शहर को विशेष रूप से सजाया गया था और हर तरफ समर्थकों की भीड़ उमड़ रही थी। निर्धारित समय पर शपथ ग्रहण समारोह शुरू हुआ, जिसमें हिमंता बिस्वा सरमा ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। जैसे ही उन्होंने दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली, पूरे परिसर में उत्साह और जोश का माहौल बन गया।
इस अवसर की सबसे बड़ी खासियत देश के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई वरिष्ठ नेता इस कार्यक्रम में शामिल हुए, जिससे यह आयोजन केवल राज्य स्तर का नहीं बल्कि राष्ट्रीय महत्व का बन गया। कई राज्यों के प्रमुख नेता भी इस समारोह के साक्षी बने, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि असम की राजनीति अब राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत पहचान बना चुकी है।
शपथ ग्रहण समारोह को बेहद भव्य तरीके से आयोजित किया गया था। सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे और पूरे शहर में प्रशासन की सतर्कता स्पष्ट दिखाई दे रही थी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी। भारी संख्या में पहुंचे लोगों ने इस आयोजन को एक जन उत्सव का रूप दे दिया।
मुख्यमंत्री बनने के बाद हिमंता बिस्वा सरमा ने अपनी प्राथमिकताओं को लेकर स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सरकार का पहला लक्ष्य जनता से किए गए वादों को तेजी से पूरा करना होगा। इसके लिए नई कैबिनेट की पहली बैठक में अगले 100 दिनों की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। विकास, रोजगार, बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक सुधार को प्राथमिकता देने की बात सामने आई है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह जीत केवल एक चुनावी सफलता नहीं, बल्कि नेतृत्व पर जनता के भरोसे की पुनः पुष्टि है। लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी यह संकेत देती है कि राज्य की जनता ने स्थिरता और विकास की नीति को स्वीकार किया है। हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व को मजबूत प्रशासनिक पकड़ और निर्णायक फैसलों के लिए जाना जाता है, जो इस वापसी का प्रमुख आधार माना जा रहा है।
यह शपथ ग्रहण केवल सत्ता परिवर्तन का प्रतीक नहीं था, बल्कि यह असम की राजनीति में एक नए आत्मविश्वास और नई दिशा की शुरुआत भी माना जा रहा है। आने वाले समय में सरकार की नीतियां और फैसले यह तय करेंगे कि यह दूसरा कार्यकाल राज्य के विकास में कितना प्रभावी साबित होता है।
