थरूर ने कहा कि दिल्ली में हर कुछ सौ मीटर की दूरी पर सुरक्षा चौकियां बनाई गई हैं। सड़कों पर कंक्रीट के बैरिकेड और स्पाइक स्ट्रिप्स लगाए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि पूरे शहर में लगभग 22,000 पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। उनके बयान के मुताबिक, सुरक्षा व्यवस्था के बीच 250 ट्रेनें रद्द कर दी गईं और 45 मेट्रो स्टेशन भी बंद कर दिए गए। कांग्रेस सांसद ने इन व्यवस्थाओं को लेकर चिंता जताई और राजधानी में आम लोगों की आवाजाही पर पड़ने वाले प्रभाव का मुद्दा उठाया।
थरूर ने दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में युवाओं को उनके घरों और सड़कों से हिरासत में लिए जाने की खबरों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी चुनावों की निष्पक्षता पर शांतिपूर्ण तरीके से सवाल उठाना चाहते हैं, लेकिन उन्हें ऐसा करने से रोकने के लिए कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने राजधानी के मध्य हिस्से में इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने को भी दमनकारी कदम बताया। उनके अनुसार, ऐसी परिस्थितियों में नागरिकों के लिए अपनी बात रखना और सार्वजनिक स्थानों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
कांग्रेस सांसद ने जंतर-मंतर तक पहुंचने पर लगाई गई पाबंदियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस स्थान को नागरिकों के लिए अपनी असहमति व्यक्त करने के उद्देश्य से निर्धारित किया गया था, लेकिन प्रदर्शन के दौरान वहां जाने वाली सड़कों पर भी प्रतिबंध लगा दिए गए। थरूर ने इसे आवागमन की स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जब राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत होती है, तब इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और ऐसी तत्परता क्यों दिखाई नहीं देती।
थरूर ने हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने की मांग की। उन्होंने सवाल किया कि यदि प्रदर्शनकारी सोमवार को दोबारा राजधानी में एकत्र होते हैं, तो क्या प्रशासन फिर से इसी तरह प्रतिबंध लगाएगा। उन्होंने कहा कि चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल उठाने वाले नागरिकों के साथ सरकार का व्यवहार लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, यदि सरकार चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा रखती है, तो उसे सवाल उठाने वालों का स्वागत करना चाहिए। इसके विपरीत, राजधानी को किले में बदलने जैसी व्यवस्था लोगों के संदेह को कम करने के बजाय बढ़ा सकती है।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि केवल बैरिकेड लगाने से चुनाव आयोग के प्रति लोगों का विश्वास बहाल नहीं होगा। उनके मुताबिक, आयोग जितनी जल्दी जनता के सवालों का जवाब देगा, उतनी जल्दी शांति बहाल होने की संभावना बनेगी। उन्होंने लोकतंत्र की मजबूती को इस बात से जोड़कर देखा कि संस्थाएं अपने कामकाज पर सवाल उठाने वाले लोगों के साथ कैसा व्यवहार करती हैं। थरूर ने दिल्ली में दिखाई गई व्यवस्था को शर्मनाक और अमानवीय बताया। उनका कहना था कि शांतिपूर्ण असहमति और चुनावों की निष्पक्षता से जुड़े सवालों का जवाब देना जरूरी है। उन्होंने हिरासत, सुरक्षा प्रतिबंधों और सार्वजनिक आवाजाही से जुड़े मुद्दों पर सरकार तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए।
