जमानत के साथ अदालत ने वाजे की गतिविधियों पर कई तरह की पाबंदियां लगाई हैं। मुख्य गवाहों के बयान दर्ज होने तक वह मुंबई, नवी मुंबई, रायगढ़, ठाणे और पालघर में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। उन्हें सात दिनों के भीतर इन जिलों से बाहर प्रस्तावित आवास का पता अदालत को देना होगा। इसके अलावा अपना पासपोर्ट एनआईए के पास जमा करना होगा। वाजे को प्रत्येक रविवार दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच स्थानीय पुलिस स्टेशन में उपस्थित होकर हाजिरी देनी होगी। एनआईए या पुलिस की ओर से कॉल अथवा वीडियो कॉल किए जाने पर उन्हें अपनी लोकेशन की जानकारी भी देनी होगी। अदालत की तय शर्तों का उल्लंघन होने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
जमानत पर विचार करते समय अदालत ने मामले में यूएपीए के तहत आतंकवादी कृत्य और देश की आर्थिक सुरक्षा को खतरे से जुड़े पहलुओं को भी देखा। आदेश में कथित विस्फोटक सामग्री, गवाहों के बयान और अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों का संदर्भ दिया गया। अदालत के सामने यह भी तथ्य रहा कि सचिन वाजे 13 मार्च 2021 से हिरासत में हैं। मामले में करीब 320 गवाह बताए गए हैं और चार्जशीट 14,000 से अधिक पन्नों की है। ऐसे में मुकदमे की सुनवाई पूरी होने में लंबा समय लगने की संभावना को भी अदालत ने जमानत पर विचार करने के दौरान ध्यान में रखा। इसके साथ ही सह-आरोपी प्रदीप शर्मा और सुनील माने को मिली जमानत का पहलू भी सामने आया।
मामला 25 फरवरी 2021 को उस समय सामने आया था, जब दक्षिण मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया के पास विस्फोटक से लदी एक एसयूवी कार बरामद हुई थी। व्यवसायी मनसुख हिरेन ने दावा किया था कि यह एसयूवी उनके पास से चोरी हुई थी। इसके कुछ दिनों बाद 5 मार्च 2021 को पड़ोसी जिले ठाणे में हिरेन का शव मिला। इसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ी और सचिन वाजे को गिरफ्तार किया गया। एनआईए के अनुसार, वाजे मुकेश अंबानी के आवास के पास एसयूवी खड़ी करने में संलिप्त था। एजेंसी ने दावा किया कि इसका मकसद अमीर लोगों में दहशत पैदा करना और एक बड़े नेता की ओर से कथित तौर पर तय किए गए 100 करोड़ रुपये के मासिक उगाही के लक्ष्य को पूरा करने के लिए पैसे वसूलना था।
एनआईए ने यह भी दावा किया कि पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट पुलिस अधिकारी प्रदीप शर्मा अपनी खोई हुई पहचान वापस पाना चाहता था। जांच एजेंसी के अनुसार, इसके बाद सचिन वाजे ने मनसुख हिरेन की हत्या की साजिश रची। एजेंसी का दावा था कि हिरेन ने विस्फोटक मामले में दोष लेने से इनकार कर दिया था और उसे ऐसी कमजोर कड़ी माना जा रहा था, जो कथित साजिश का खुलासा कर सकता था। इन आरोपों और मामले में चल रही न्यायिक प्रक्रिया के बीच अदालत ने वाजे को जमानत तो दी है, लेकिन गवाहों के बयान दर्ज होने तक पांच जिलों में प्रवेश समेत कई प्रतिबंध लागू रहेंगे।
