उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष जनवरी से 10 जून के बीच सरकारी चाइल्ड सपोर्ट हेल्पलाइन 1098 पर बच्चों के शोषण से संबंधित 101 शिकायतें दर्ज की गईं। वहीं आपातकालीन हेल्पलाइन 999 पर मई तक कार्यस्थलों पर बाल श्रमिकों के साथ दुर्व्यवहार और शोषण से जुड़ी 33 शिकायतें प्राप्त हुईं। इन मामलों ने बाल सुरक्षा व्यवस्था और कार्यस्थलों की निगरानी को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
राजधानी ढाका में घरेलू काम करने वाले बच्चों पर किए गए एक सर्वे में सामने आया कि लगभग आधे बच्चों को किसी न किसी प्रकार के शोषण का सामना करना पड़ता है। वहीं बड़ी संख्या में बच्चों पर अत्यधिक काम का बोझ भी पाया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू कार्यों में लगे बच्चों की स्थिति विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण है क्योंकि ऐसे कार्यस्थलों की नियमित निगरानी करना कठिन होता है।
बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों का कहना है कि होटल, रेस्तरां, परिवहन, ईंट भट्टों और अन्य असंगठित क्षेत्रों में कार्यरत बच्चों को लंबे समय तक काम करना पड़ता है। कई मामलों में उन्हें शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है, जबकि कुछ बच्चों को निर्धारित मेहनताना भी नहीं मिल पाता। सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों के बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
सामाजिक संगठनों का यह भी कहना है कि बाल श्रमिकों को अक्सर इसलिए काम पर रखा जाता है क्योंकि उन्हें आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है और वे अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की स्थिति में नहीं होते। असंगठित क्षेत्रों में निगरानी की सीमित व्यवस्था के कारण ऐसे मामलों का समय पर पता लगाना और प्रभावी कार्रवाई करना भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
घरेलू कामगारों के अधिकारों के लिए कार्यरत संगठनों ने भी बच्चों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार के अनेक मामलों पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि वर्षों से स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है और आज भी कम उम्र के बच्चे घरेलू कार्यों में लगे हुए शोषण का सामना कर रहे हैं। कई मामलों में मानसिक, शारीरिक और यौन उत्पीड़न जैसी गंभीर शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
हालिया सर्वेक्षणों के अनुसार, पिछले छह वर्षों में बांग्लादेश में बाल श्रम करने वाले बच्चों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2019 की तुलना में अब अधिक बच्चे कार्यबल का हिस्सा बन चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक कठिनाइयों, बढ़ती महंगाई और पारिवारिक आय में कमी के कारण अनेक बच्चों को पढ़ाई छोड़कर रोजगार की ओर जाना पड़ रहा है।
बाल अधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि बाल श्रम की समस्या से निपटने के लिए केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए शिक्षा तक आसान पहुंच, गरीब परिवारों को आर्थिक सहायता, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का विस्तार और असंगठित क्षेत्रों में प्रभावी निगरानी व्यवस्था विकसित करना आवश्यक है। उनका मानना है कि सरकार, सामाजिक संस्थाओं और समुदायों के संयुक्त प्रयासों से ही बच्चों को सुरक्षित वातावरण और बेहतर भविष्य उपलब्ध कराया जा सकता है।
