महापंचायत के दौरान किसानों की ओर से प्रशासन को सीमित समय का अल्टीमेटम दिया गया। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची और बातचीत का दौर शुरू हुआ। हालात को देखते हुए कई विभागों से जुड़े अधिकारी भी चर्चा प्रक्रिया में शामिल हुए। बैठक के दौरान किसान नेताओं ने विभिन्न मामलों को गंभीरता से उठाया और कई मुद्दों पर त्वरित कार्रवाई की मांग की। लंबे समय तक चली बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच कई बिंदुओं पर चर्चा हुई।
इस दौरान राकेश टिकैत ने एक मामले में कार्रवाई को लेकर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने मंच से अपनी बात रखते हुए प्रशासन के सामने खुली चुनौती पेश की और अपने तेवर साफ कर दिए। पंचायत में मौजूद किसानों ने भी उनके समर्थन में जोरदार आवाज उठाई। किसान नेताओं की सख्त रणनीति और एकजुटता के कारण प्रशासन बेहद सतर्क नजर आया। माहौल को शांत बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए थे।
महापंचायत के दौरान किसानों से जुड़े मुद्दों के अलावा अन्य जनहित विषयों पर भी चर्चा की गई। बढ़ती महंगाई और ईंधन कीमतों को लेकर भी नाराजगी जताई गई। साथ ही युवाओं और रोजगार से जुड़े विषयों पर भी चिंता व्यक्त की गई। किसान नेताओं ने कहा कि ग्रामीण और किसान वर्ग से जुड़े मुद्दों को लगातार नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और इन विषयों पर गंभीर पहल की आवश्यकता है। सभा में मौजूद लोगों ने भी इन मुद्दों पर अपनी सहमति जाहिर की।
कई घंटों तक चले संवाद के बाद स्थिति में कुछ नरमी देखने को मिली। बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने आगे भी चर्चा जारी रखने की सहमति जताई। प्रशासन की ओर से संकेत दिए गए कि किसानों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर विस्तार से विचार किया जाएगा और समाधान की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे। वहीं किसान पक्ष ने भी कहा कि उनकी प्राथमिकता बातचीत के जरिए समाधान निकालना है, लेकिन किसानों के हितों से जुड़े मामलों पर वे पीछे हटने के पक्ष में नहीं हैं। महापंचायत ने एक बार फिर यह संकेत दिया कि किसान संगठनों की आवाज और जमीनी पकड़ अभी भी राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर प्रभाव रखती है।
